नई दिल्ली 15 may, (Rns): नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में भारत ने वैश्विक मंच पर अपना कड़ा और स्पष्ट रुख पेश किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया को दो टूक शब्दों में संदेश दिया है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में केवल सैन्य ताकत या पश्चिमी प्रतिबंध ही समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। पश्चिम एशिया के तनाव से लेकर आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में सुधार तक, भारत ने हर गंभीर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए समावेशी वैश्विक व्यवस्था की वकालत की है।
समुद्र में व्यापार बाधित हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा भारी असर
बैठक के दौरान विदेश मंत्री का सबसे ज्यादा फोकस पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालातों पर रहा। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) का सीधा जिक्र करते हुए आगाह किया कि समुद्री रास्तों में किसी भी तरह की बाधा या ऊर्जा ढांचे पर खतरा पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को हिला कर रख सकता है। ईरान संकट और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया गया है।
गाजा संकट पर चिंता और पश्चिमी देशों की नीति पर कड़ा प्रहार
भारत ने मंच से गाजा के मानवीय संकट को भी प्रमुखता से उठाया और उसे नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी। जयशंकर ने सीजफायर, मानवीय मदद और ‘टू-स्टेट थ्योरी’ (दो राष्ट्र सिद्धांत) का समर्थन दोहराया। उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान और यमन का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिमी देशों की ‘एकतरफा प्रतिबंधों’ वाली नीति पर भी करारा प्रहार किया। जयशंकर ने साफ कहा कि यूएन चार्टर के खिलाफ लगाए गए इन दंडात्मक उपायों का सबसे ज्यादा खामियाजा विकासशील देशों को भुगतना पड़ता है। दबाव की राजनीति कभी भी कूटनीतिक संवाद का विकल्प नहीं हो सकती।
आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ और UNSC में सुधार की जोरदार मांग
पड़ोसी देश का नाम लिए बिना भारत ने सीमा पार आतंकवाद पर अपना पारंपरिक लेकिन बेहद सख्त रुख दुनिया के सामने रखा। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है और इसके प्रति पूरी दुनिया का ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) का मानक होना चाहिए। इसके अलावा, विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाते हुए कहा कि मौजूदा चुनौतियां साबित करती हैं कि बहुपक्षीय व्यवस्था अब कमजोर पड़ रही है, इसलिए इन सुधारों को अब और नहीं टाला जा सकता। पूरे भाषण के जरिए भारत ने साफ कर दिया कि वह टकराव (Confrontation) के बजाय कूटनीति और बातचीत (Dialogue) से ही वैश्विक शांति का रास्ता देखता है।

