0-रक्षा-ऊर्जा क्षेत्र में समझौते पर हस्ताक्षर, पीएम के विमान को एफ-16 ने एस्कॉर्ट किया
नईदिल्ली,15 मई (आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से 5 देशों के दौरे पर रवाना हो गए हैं। सबसे पहले वे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री यहां केवल 4 घंटे के आसपास रुकेंगे, लेकिन ईरान युद्ध से उपजे हालात के बीच इस छोटे से दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा और ईरान युद्ध को लेकर चर्चा हुई। आइए जानते हैं दौरा कितना अहम है।
दोनों पक्षों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल के स्थिर भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामरिक पेट्रोलियम भंडार पर एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। इसके अलावा एलपीजी की आपूर्ति पर दीर्घकालिक सहयोग को लेकर एक समझौता हुआ। एक अहम वित्तीय घोषणा में, भारतीय अवसंरचना परियोजनाओं के साथ-साथ आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में निवेश के लिए 5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई।
प्रधानमंत्री मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और जायद अल नाहयान भारत- यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता ऊर्जा सहयोग के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे। दोनों देशों के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मौजूदगी में एलपीजी आपूर्ति समेत कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
यात्रा के 3 एजेंडे निर्धारित किए गए हैं- सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, एलपीजी सुरक्षा और स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) का विस्तार। भारत ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ मेंगलौर भंडार को अधिकतम क्षमता तक भरने के लिए समझौता किया है। दोनों देश 10 साल तक एलपीजी सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की घटती कीमत को देखते हुए रुपये-दिरहम व्यापार तंत्र का विस्तार करना भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दौरा बेहद अहम है। यूएई ने हाल ही में तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक छोडऩे का ऐलान किया है और 2027 तक कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनाई है। ऐसे में भारत और यूएई के बीच लंबी अवधि का समझौता होने की उम्मीद है। सऊदी अरब और यूएई में बढ़ती दरार के नजरिए से भी दौरा अहम है।
पूर्व भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने कहा, पश्चिम एशिया के हालात के बीच प्रधानमंत्री का यूएई दौरा काफी अहम है। यह भारत की तरफ से समर्थन का मजबूत संकेत भी माना जा रहा है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा, यह यात्रा भारत और यूएई के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच पहले से व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और इस दौरे का मकसद उसे और आगे बढ़ाना है।
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान खाड़ी देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया, तो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एफ-16 लड़ाकू विमानों के एक समूह ने उनका स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा, आज आपकी वायुसेना द्वारा मुझे जिस प्रकार से सुरक्षा प्रदान की गई, वह भारत के लोगों के लिए सम्मान की बात है. काफी समय से हमारी फोन पर बातचीत चल रही थी, लेकिन मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए उत्सुक था. आज आपसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई. मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात के दौरान यह बात कही.
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी को ले जा रहे विमान ने यूएई के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया, सैन्य विमानों के एक समूह ने उनका स्वागत किया. संदेश में आगे कहा गया, स्क्वाड्रन लीडर ने स्वागत के प्रतीक के रूप में विमान को हवाई अड्डे तक ले जाने की अनुमति मांगी.
संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति हवाई अड्डे पर यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने स्वागत किया. यहां प्रधानमंत्री का औपचारिक रूप से स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, मैं संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का अबू धाबी हवाई अड्डे पर मेरा स्वागत करने के विशेष भाव के लिए धन्यवाद करता हूं. मैं ऊर्जा, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारत-यूएई संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में हमारी चर्चाओं के लिए उत्सुक हूं.
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मैं आपको हार्दिक धन्यवाद देता हूं. जनवरी में आपकी भारत यात्रा के दौरान, हमने अपने संबंधों को और भी बेहतर करने पर सहमति व्यक्त की थी. इतने कम समय में भी, हमने सभी मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति की है. आज की स्थिति में, भारत-यूएई रणनीतिक सहयोग का महत्व बहुत बढ़ गया है. आने वाले समय में, हम हर क्षेत्र में मिलकर आगे बढ़ेंगे.
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