नई दिल्ली,15 मई (आरएनएस)। गृह मंत्रालय ने साल 2023 की मणिपुर जातीय हिंसा की जांच कर रहे जस्टिस बलबीर सिंह चौहान आयोग का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. अब आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 20 नवंबर, 2026 तक का समय दिया गया है. यह विस्तार मणिपुर में दोबारा भड़की हिंसा की घटनाओं के बीच दिया गया है.
गृह मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अगुवाई वाले इस तीन-सदस्यीय पैनल से कहा गया है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट जितनी जल्दी हो सके, लेकिन हर हाल में 20 नवंबर, 2026 से पहले सौंप दें.
बता दें कि बुधवार, 13 मई को मणिपुर के कांगपोकपी जिले में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा किए गए हमले में चर्च के तीन वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 11 बजे कोटजि़म और कोटलेन के बीच हुई, जब चर्च के नेता और अन्य लोग लमका में आयोजित यूनाइटेड बैप्टिस्ट चर्च कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर कांगपोकपी लौट रहे थे.
इसके बाद गुरुवार को, राज्य में विभिन्न समूहों द्वारा नागा और कुकी समुदायों के 38 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया. रिपोर्ट लिखे जाने तक, सुरक्षा बलों द्वारा कई बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है.
इस आयोग का गठन 4 जून, 2023 को किया गया था. इससे कुछ ही दिन पहले, मणिपुर के पहाड़ी जिलों में उसी साल 3 मई को आयोजित आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी. यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में निकाला गया था.
इस साल फरवरी में, आयोग की रिपोर्ट सौंपने की तय तारीख से तीन महीने पहले, गुवाहाटी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अजय लांबा ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की थी. आयोग के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हिमांशु शेखर दास और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आलोक प्रभाकर शामिल हैं.
यह आयोग उन घटनाओं के क्रम की जांच कर रहा है जिनकी वजह से हिंसा भड़की. साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या व्यक्तियों से कोई चूक या कर्तव्य में लापरवाही हुई थी. आयोग इस बात का भी मूल्यांकन कर रहा है कि झड़पों को रोकने और हिंसा भड़कने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा उपाय कितने पर्याप्त थे.
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