सुल्तानपुर 17 मई (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और पारदर्शी प्रशासन के दावों के बीच सुल्तानपुर वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग में वर्षों से एक ही जनपद और एक ही रेंज में जमे कर्मचारियों को लेकर अब शासन की स्थानांतरण नीति पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि विभाग में तैनात कई कर्मचारी दो से ढाई दशक से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, लेकिन न शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही विभागीय अधिकारियों ने इस ओर गंभीरता दिखाई।
सूत्रों के मुताबिक वन विभाग में लंबे समय से जमे कर्मचारियों और अवैध लकड़ी कारोबारियों के बीच गहरे संबंध होने की चर्चा आम है। जिले में लगातार फल-फूल रही अवैध आरा मशीनों और हरियाली के हो रहे नुकसान को भी इसी व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर स्थानांतरण होते रहते तो शायद वन माफियाओं का इतना मजबूत नेटवर्क खड़ा नहीं हो पाता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकार की स्थानांतरण नीति का पालन वन विभाग में क्यों नहीं हो रहा। जहां प्रदेश सरकार हर विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, वहीं सुल्तानपुर वन विभाग में कई कर्मचारी वर्षों से अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं। जानकारी के अनुसार डिवीजन कार्यालय में तैनात वन दारोगा सोभनाथ लगभग 28 वर्षों से जिले में कार्यरत हैं। वहीं राकेश चौहान करीब 25 वर्षों से अखंडनगर-कादीपुर क्षेत्र में तैनात बताए जा रहे हैं। कमलेश सिंह लगभग 22 वर्षों से सदर रेंज में जबकि रमेश बहादुर सिंह करीब 20 वर्षों से जयसिंहपुर रेंज में जमे हुए हैं। इसी तरह दीपक सिंह लगभग 17 वर्षों से जिले में सेवाएं दे रहे हैं। केवल वन दारोगा ही नहीं बल्कि रेंजर और डिप्टी रेंजर स्तर के अधिकारी भी लंबे समय से जिले में तैनात हैं। चंद्र प्रकाश करीब 18 वर्षों से जयसिंहपुर रेंज में कार्यरत बताए जाते हैं। वहीं अतुल सिंह लंभुआ रेंज में लगभग 18 वर्षों से और डीके यादव करीब 15 वर्षों से जिले में तैनात हैं। सूत्रों का दावा है कि डीके यादव का बीते वर्ष गैर जनपद तबादला हुआ था लेकिन बाद में उन्हें फिर सुल्तानपुर में ही पोस्टिंग मिल गई।
सूत्र यह भी बताते हैं कि विभागीय स्तर से शासन को उन कर्मचारियों की सूची तक नहीं भेजी जाती, जो वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं। चर्चा है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भी ऐसी कोई सूची शासन को प्रेषित नहीं की गई। मामले पर जब डीएफओ अमित सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि स्थानांतरण करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि शासन स्तर से किसी कर्मचारी का तबादला होता है तो विभाग की ओर से उसे कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस उत्तर प्रदेश सरकार की पहचान सख्त प्रशासन और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई को लेकर होती है, उसी सरकार की नीतियों का सुल्तानपुर वन विभाग में पालन क्यों नहीं हो रहा। क्या लंबे समय से जमे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या फिर वन विभाग की यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।
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