लखनऊ ,11 जुलाई(आरएनएस)। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने और जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शनिवार को लखनऊ व्यापार मंडल कार्यालय में व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव (राज्य कर) एवं राज्य कर आयुक्त कामिनी रतन चौहान ने व्यापारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर सुरक्षित पतंगबाजी को बढ़ावा देने और प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ सामूहिक अभियान चलाने का आह्वान किया।बैठक की अध्यक्षता लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने की। उन्होंने कहा कि राजधानी के व्यापारी प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का व्यापार नहीं कर रहे हैं और इस पर पहले से ही स्वैच्छिक रोक लगा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री मुख्य रूप से कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में चौक थाने में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने प्रतिबंधित मांझे की चरखियां और धागे नष्ट किए थे तथा भविष्य में इसका व्यापार नहीं करने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को दोहराते हुए शनिवार को भी सभी व्यापारियों ने प्रमुख सचिव की मौजूदगी में शपथ ली कि वे किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री नहीं करेंगे।अमरनाथ मिश्र ने कहा कि शहर में फ्लाईओवर और ऊंचे पुलों की संख्या बढऩे से प्रतिबंधित मांझे के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है।व्यापार मंडल के महामंत्री अनुराग मिश्रा ने व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं को प्रमुख सचिव के समक्ष रखते हुए कहा कि व्यापारी पहले से ही प्रतिबंधित मांझा नहीं बेचने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसकी जिम्मेदारी भी लेते हैं। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता होगी वहां व्यापारी स्वयं मिलकर फ्लाईओवरों पर सुरक्षा के लिए तार लगाने जैसे कार्यों में भी सहयोग करेंगे।वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने कहा कि जब व्यापारी स्वयं प्रतिबंधित मांझा न बेचने का संकल्प ले चुके हैं तो प्रशासन को भी जांच के दौरान व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को साथ रखना चाहिए, ताकि किसी भी व्यापारी का अनावश्यक उत्पीडऩ न हो।लखनऊ व्यापार मंडल के चेयरमैन राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि यदि प्रतिबंधित मांझे के निर्माण स्तर पर ही प्रभावी रोक लगा दी जाए तो उसके अवैध व्यापार पर स्वत: अंकुश लग जाएगा।प्रमुख सचिव (राज्य कर) कामिनी रतन चौहान ने कहा कि प्रमुख सचिव का दायित्व संभालने के बाद व्यापारियों के साथ यह उनका पहला सीधा संवाद है। उन्होंने लखनऊ व्यापार मंडल के पारिवारिक माहौल और कम समय के नोटिस पर बड़ी संख्या में व्यापारियों की उपस्थिति की सराहना की।उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का मुद्दा केवल किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने भी निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान किसी भी व्यापारी, निर्माता या कारीगर का अनावश्यक उत्पीडऩ नहीं होना चाहिए, साथ ही कानून का कड़ाई से पालन भी सुनिश्चित किया जाए।कामिनी रतन चौहान ने बताया कि पुलिस, गृह और पर्यावरण विभाग आपसी समन्वय से प्रतिबंधित मांझे के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए विशेष रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे जन-जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों, बच्चों और आम नागरिकों को सुरक्षित मांझे के उपयोग के लिए प्रेरित करें, जिससे दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।कार्यक्रम के अंत में प्रमुख सचिव ने सभी व्यापारियों और लखनऊ व्यापार मंडल का सफल संवाद कार्यक्रम के आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में राज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापार मंडल के पदाधिकारी, पतंग विक्रेता, निर्माता तथा बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
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