– फल मक्खी व कैटरपिलर कीट से सतर्क रहने की अपील
फतेहपुर 17 मई (आरएनएस)। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने आम की फसल को हानिकारक कीटों और रोगों से बचाने के लिए किसानों एवं बागवानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि मई से जुलाई के बीच फल मक्खी और कैटरपिलर/कटर कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जिससे आम की फसल को 30 से 60 प्रतिशत तक नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि फल मक्खी कीट पक रहे फलों में अंडे देकर गूदे को नुकसान पहुंचाता है, जिससे फल सड़कर गिर जाते हैं और बाजार योग्य नहीं रह जाते। वर्षा ऋतु में तापमान और आद्र्रता बढऩे से इन कीटों का प्रकोप और अधिक बढ़ जाता है। उद्यान विभाग ने किसानों को रासायनिक दवाओं के प्रयोग से पहले एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत बागों की नियमित सफाई, खरपतवार नियंत्रण, हल्की जुताई और गिरे हुए सड़े फलों को नष्ट करने पर जोर दिया गया है। विभाग ने छोटे फलों की बैगिंग करने, मिथाइल यूजीनॉल ट्रैप और क्यू ल्यूर ट्रैप लगाने की भी सलाह दी है। आम और अमरूद के बागों में 20 से 25 ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाने से फल मक्खी नियंत्रण में मदद मिलेगी। फल मक्खी नियंत्रण के लिए बैट एप्लीकेशन तकनीक के तहत गुड़, डेल्टामेथ्रिन और पानी का घोल बनाकर पेड़ों के तनों और आसपास की झाडिय़ों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही नीम तेल का 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव भी प्रभावी बताया गया है। अंतिम विकल्प के रूप में रासायनिक नियंत्रण हेतु डेल्टामेथ्रिन 2.8 प्रतिशत ईसी का घोल बनाकर फल तुड़ाई से 3 से 7 दिन पहले छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं कैटरपिलर कटर कीट को आम उत्पादकों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए विभाग ने लाइट ट्रैप के प्रयोग की सलाह दी है। इसके अलावा क्लोरोपाइरीफॉस व साइपरमेथ्रिन मिश्रित दवा, इमामेक्टिन बेंजोएट अथवा स्पिनेटोरम दवा के छिड़काव की सलाह दी गई है। आवश्यकता पडऩे पर 8 से 10 दिन बाद दोबारा छिड़काव करने को कहा गया है। उद्यान विभाग ने किसानों से कीटनाशकों के प्रयोग के दौरान सावधानी बरतने की अपील करते हुए दस्ताने, मास्क और चश्मे का उपयोग करने, बच्चों व जानवरों से दवाओं को दूर रखने तथा खाली डिब्बों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के निर्देश दिए।
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