बीजापुर,18 मर्ई (आरएनएस)। कभी नक्सल प्रभाव और अभावों से जूझता गांव आज विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। वर्षों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे इस गांव में अब सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचने लगा है। इसी बदलाव की मिसाल बने हैं ग्राम पंचायत संतोषपुर के निवासी 53 वर्षीय लिंगु कुडमुल।लिंगु कुडमुल अपनी पत्नी के साथ लंबे समय से एक जर्जर झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे थे। संतान नहीं होने और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था। बरसात में टपकती छत, ठंड में असुरक्षित रातें और हर मौसम में परेशानियां उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी थीं।गांव के नक्सल मुक्त होने के बाद विकास कार्यों ने गति पकड़ी और सरकारी योजनाओं की पहुंच ग्रामीणों तक बढ़ी। इसी दौरान लिंगु कुडमुल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर स्वीकृत हुआ। नया घर उनके लिए सिर्फ आशियाना नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद का प्रतीक बन गया।पक्का घर बनने के बाद अब लिंगु कुडमुल और उनकी पत्नी सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि समय पर मिली सहायता किसी के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है। नियद नेल्लानार गांव की यह कहानी संघर्ष से सम्मान तक की प्रेरणादायक यात्रा है, जो विकास, संवेदनशीलता और उम्मीद की जीवंत मिसाल बनकर सामने आई है।
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