रायपुर, 18 मई (आरएनएस)। राज्य शासन के मंशानुरूप कलेक्टर गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले में आगामी खरीफ सीजन के लिये समितियों में उर्वरक भंडारण किया जा रहा है। जिले को यूरिया 34,800, डीएपी 19,000, पोटाश 4,300, एसएसपी 5,100 तथा एनपीके 12,500 कुल 75,700 मीट्रिक टन का उर्वरक लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसके विरूद्ध उर्वरक भंडारण यूरिया 14,255, डीएपी 5,083, पोटाश 1,751, एसएसपी 2,534 तथा एनपीके 4,661 कुल 28,284 मीट्रिक टन हो चुका है। अब तक यूरिया 3,638, डीएपी 1,261, पोटाश 431, एसएसपी 611 तथा एनपीके 1,563 कुल 7504 मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। जिले में उर्वरक भंडारण वितरण का कार्य निरंतर जारी है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल डी.ए.पी. पर निर्भर रहना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि इससे मिट्टी का संतुलन भी बिगड़ सकता है। बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थय को बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है। धान जैसी प्रमुख खरीफ फसल के लिए यूरिया, फॅास्फेट, पोटाश और एन.पी.के. जैसे उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करना लाभकारी साबित होता है तथा डीएपी पर निर्भरता कम कर इसे वैकल्पिक उर्वरक के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही कृषकों को नील हरित काई, हरी खाद तथा जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर्स) का उपयोग करने हेतु भी सलाह दिया गया है, जो की रासायनिक उर्वरकों के निर्भरता पर कमी लाएगी। किसान बोरियों वाली खाद के स्थान पर नैनों यूरिया एवं नैनों डीएपी (तरल) को प्राथमिकता दें। यह न केवल परिवहन में आसान है बल्कि इसकी उपयोग क्षमता 90 प्रतिशत तक है। इसके छिड़काव से फसल को सीधा पोषण मिलता है और जमीन भी खराब नहीं होती।
उप संचालक कृषि सतीश अवस्थी ने बताया कि डीएपी की एक बोरी के बराबर पोषक तत्व अन्य विकल्पों से भी प्राप्त किए जा सकते है। उन्होंने सुझाव दिया कि 1 बोरी डीएपी के स्थान पर 3 बोरी एसएसपी के साथ या 2 बोरी अमोनियम फॅास्फेट सल्फेट का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा 1 बोरी टीएसपी के साथ 2 बोतल नैनो यूरिया 500 मि.ली. और 2 बोतल नैनो डीएपी 500 मि.ली. भी प्रभावी विकल्प है।
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