लखनऊ 19 मई (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित जल जीवन मिशन के अंतर्गत ‘जल सारथीÓ मोबाइल ऐप ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी, शिकायत निवारण और गुणवत्ता परीक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। यह डिजिटल पहल न केवल विभागीय कार्यों को पारदर्शी बना रही है, बल्कि ग्रामीणों को भी अपने गांव में चल रही जल योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने का अवसर दे रही है।ग्रामीण जलापूर्ति विभाग और नमामि गंगे से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ‘जल सारथीÓ ऐप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति जल जीवन मिशन की परियोजनाओं का लाइव अपडेट देख सकता है। मल्टी लेवल डैशबोर्ड प्रणाली के जरिए राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक चल रहे कार्यों की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे आम नागरिकों को भी यह जानकारी मिल रही है कि उनके गांव में पानी की टंकी, पाइपलाइन या घरेलू नल कनेक्शन का कार्य किस स्थिति में है।विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन तथा नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग प्रभास कुमार ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों की लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए करीब 40 हजार परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं को ऐप के साथ ऑनलाइन जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी प्रगति की जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध हो सके।उन्होंने बताया कि ऐप में राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के अलग-अलग डैशबोर्ड बनाए गए हैं। किसी गांव में जैसे ही पानी की टंकी, पाइपलाइन अथवा घरेलू नल कनेक्शन का कार्य पूरा होता है, उसका विवरण ऐप पर अद्यतन कर दिया जाता है। इन कार्यों को जियो टैगिंग से जोड़ा गया है, जिससे किसी भी स्थान की प्रगति का सटीक आकलन संभव हो सका है। विभाग अब जल स्रोत से लेकर घरों तक लगे नलों और उनसे जुड़ी परिसंपत्तियों जैसे पाइपलाइन, मोटर और जल टंकी की भी प्रभावी निगरानी कर पा रहा है।जल सारथीÓ ऐप ग्रामीणों के लिए शिकायत निवारण का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है। अब लोगों को जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। ऐप के माध्यम से ग्रामीण नए नल कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं और जलापूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आने पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा ग्राम प्रधान, प्लंबर और संबंधित अधिकारियों के संपर्क विवरण भी ऐप में उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके।जल जीवन मिशन के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत की जानकारी भी ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग दो लाख किलोमीटर सड़कों को पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदा गया था, जिनमें से 1.94 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का पुनर्निर्माण पूरा किया जा चुका है।ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पानी की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। प्राथमिक स्तर पर फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी स्थानीय महिलाओं को सौंपी गई है। इन महिलाओं का विवरण भी ऐप पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि उनकी जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और ग्रामीण स्वयं भी अपने क्षेत्र में चयनित कर्मियों की जानकारी की पुष्टि कर सकें।
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