लखनऊ 19 मई (आरएनएस )। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच आयुष्मान भारत योजना गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक 50 लाख 40 हजार 937 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने कुल 91 लाख 87 हजार 418 बार इलाज कराया है। मरीजों के उपचार के लिए 15 हजार 140 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जिनमें से अब तक 13 हजार 315 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।राज्य स्वास्थ्य अभिकरण (साचीज) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सबसे अधिक भुगतान बरेली जिले के लाभार्थियों के इलाज पर किया गया है। बरेली जिले में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने योजना का लाभ लिया। यहां कुल 3 लाख 72 हजार 319 उपचार क्लेम दर्ज किए गए। इसके लिए 682 करोड़ 99 लाख 77 हजार 778 रुपये का क्लेम किया गया, जबकि 620 करोड़ 81 लाख 64 हजार 359 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस उपलब्धि के साथ बरेली प्रदेश में पहले स्थान पर है।गोरखपुर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 1 लाख 71 हजार 492 लाभार्थियों ने आयुष्मान योजना के तहत उपचार प्राप्त किया। जिले में कुल 3 लाख 59 हजार 529 क्लेम दर्ज किए गए, जिनके लिए 591 करोड़ 25 लाख 5 हजार 428 रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई। इनमें से 539 करोड़ 56 लाख 47 हजार 285 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।मुरादाबाद तीसरे स्थान पर रहा, जहां 1 लाख 29 हजार 1 लाभार्थियों ने योजना का लाभ उठाया। जिले में 2 लाख 57 हजार 480 क्लेम दर्ज किए गए, जिनके लिए 519 करोड़ 60 लाख 94 हजार 301 रुपये का क्लेम किया गया और 459 करोड़ 91 लाख 43 हजार 815 रुपये का भुगतान किया गया।अर्चना वर्मा ने बताया कि बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ और कानपुर नगर के लाभार्थियों ने भी योजना का व्यापक लाभ लिया है। बिजनौर में 486 करोड़ रुपये से अधिक, सहारनपुर में 463 करोड़ रुपये से अधिक और वाराणसी में 449 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए। वहीं लखनऊ और कानपुर नगर जैसे बड़े शहरों में भी करोड़ों रुपये का भुगतान कर मरीजों को राहत पहुंचाई गई है।प्रदेश सरकार का कहना है कि वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि अब गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़े अस्पतालों में भी नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।
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