अयोध्या 19 मई (आरएनएस )। वामदलों ने लखनऊ के कैसरबाग में जिला न्यायालय व पुराने हाईकोर्ट परिसर के पास प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं के चौंबरों को बुलडोजर से ढहाने और इसका शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वकीलों पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे न्याय व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ पर सीधा हमला और पूरी तरह से तानाशाहीपूर्ण रवैया करार दिया है। भाकपा जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी एवं भाकपा (माले) जिला प्रभारी अतीक अहमद ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार हर लोकतांत्रिक आवाज और न्याय के पक्ष में खड़े होने वाले तबके को डराने व कुचलने की नीति पर काम कर रही है। कानून और व्यवस्था का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार में अब कानून के रक्षक (अधिवक्ता) भी सुरक्षित नहीं हैं। नेताओं ने कहा कि अपने चैंबरों और कार्यस्थल को बचाने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इस हिंसक लाठीचार्ज में कई वकील गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह सिर्फ चौंबर ही नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी को भी उजाडऩे की कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के भीतर चाहे अपनी मांगों को लेकर मार्च कर रहे श्रमिक-कर्मचारी हों या न्याय की गुहार लगा रहे अधिवक्ता, योगी सरकार हर शांतिपूर्ण प्रतिवाद को लाठी और पुलिसिया दमन के बल पर दबा देना चाहती है। वामदलों ने मांग की कि जिन अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़े गए हैं, उन्हें उचित वैकल्पिक स्थान दिया जाए, उनके नुकसान की भरपाई की जाए और घायल वकीलों के मुफ्त इलाज व सम्मानजनक मुआवजे की व्यवस्था हो। इसके अलावा, अधिवक्ताओं पर बर्बर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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