नईदिल्ली,19 मई (आरएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में जेल में बंद आरोपी उमर खालिद को अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया। कड़कडड़ूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी खालिद की 15 दिनों की अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि खालिद द्वारा अस्थायी रिहाई की मांग के लिए बताए गए कारण उचित नहीं हैं और वह हर बार अंतरिम जमानत नहीं दे सकता।
खालिद ने चाचा के निधन के 40 दिन बाद होने वाले अनुष्ठान में शामिल होने और मां की देखभाल करने के लिए 15 दिन की जमानत मांगी थी। खालिद के वकील साहिल घई ने कहा कि उनके परिवार में उनके पिता-माता और 5 बहनें हैं, लेकिन उनके पिता 71 वर्ष के हैं और उनकी सभी बहनें शादी के बाद अलग रहती हैं। वकील ने बताया कि खालिद की मां की सर्जरी होनी है और खालिद उनकी देखभाल करना चाहते हैं।
जमानत नामंजूर कर कोर्ट ने कहा कि आवेदक को पहले भी अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मांगने पर उसे जमानत दे देनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चाचा के 40वें में शामिल होना आवश्यक नहीं है, अगर रिश्ता करीबी होता तो उनकी मृत्यु के समय रिहाई मांगी गई होती। कोर्ट ने कहा कि मां की सर्जरी बहुत सरल है और अपनी मां की मदद के लिए उनकी बेटियों के आने की उम्मीद है।
खालिद की जमानत याचिका ऐसे समय रद्द हुई है, जब एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय पीठ ने खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले को गलत बताया था। पीठ ने जमानत को नियम और जेल को अपवाद बताया था।
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