*प्रतिवर्ष जंगल में आग लगने की होती आई है घटना,संयोग या साजिश
मीरजापुर 20 मई (आरएनएस)। जिले के अंतिम छोर पर स्थित ड्रमंडगंज वनरेंज के करनपुर व मड़वा धनावल जंगल में मंगलवार दोपहर में आग लग गई, जो रात से लेकर दूसरे दिन सुबह भी कुछ हिस्सों में जारी रही है। तेज हवाओं के चलने से आग जंगल के कई हिस्सों में तेजी से फैल गई। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी देर रात तक वन विभाग की टीम आग बुझाने जंगल में नही पहुंच पाई थीं।तेज हवाओं के चलने से आग पहाड़ के ऊपरी हिस्से में तेजी से फैलने लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि आग सीमावर्ती मध्यप्रदेश के जंगलों से बढ़ते हुए करनपुर व मड़वा धनावल पहाड़ तक पहुंच गई थी। आग की चपेट में आने से जंगल के हरे भरे तेंदू, पलाश, नीम, अर्जुन, सलई, सिद्ध, बांस आदि पेड़ पौधे जलकर राख हो रहे हैं। जंगलों में तेजी से आग फैलने से वन्यजीवों पर भी खतरा मंडराने लगा है। वहीं इस संबंध में क्षेत्रीय वन अधिकारी ड्रमंडगंज से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ बता रहा था। यूपी-एमपी से लगे हुए मीरजापुर के ड्रमंडगंज वन क्षेत्र के जंगल में आग लगने की घटना कोई पहली घटना नहीं है यह प्रतिवर्ष की घटना बताई जाती है। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या यह महज़ एक संयोग ही हो सकता है या कोई गहरी साजि़श। साजिश की आशंका इस लिए कहा जा रहा है कि प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों पेड़ पौधों के रोपण का ढिंढोरा पीटकर रिकार्ड हासिल करने की होड़ में बयान बहादुरों ने इनपर लाखों पानी की तरह बहाते भी आएं हैं,अब यह अलग बात है कि कागजों में हर वर्ष लाखों पौधे लगाकर लाखों खर्च कर कितने जंगल का और पौधों को बढ़ावा दिया गया है यह कोई बताने को तैयार नहीं होता है। दूसरी ओर कहने को तो वन क्षेत्राधिकारी से लेकर रेंज में तैनात वाचर, फारेस्ट गार्ड इत्यादि बराबर जंगल की निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं, बावजूद इसके जंगल में भीषण आग लगने की घटनाएं हज़म नहीं होती है। मजे कि बात तो यह है कि हर बार जंगल में आग लगने के बाद जिम्मेदार जवाब देही से बचते हुए आस-पास के गांवों के ग्रामीणों एवं चरवाहों को कसूरवार ठहरा देते हैं कि किसी ने बीड़ी सिगरेट पीने के बाद फेंका होगा उसी से आग लगी होगी। बड़ा सवाल यह है कि यह रटा-रटाया जुमला कब तक वन विभाग दुहराता रहेगा, क्यों कि जंगल में आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ग्रामीण या चरवाहे जोखिम मोल लेना नहीं चाहेंगे।
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