कोटद्वार,20 मई (आरएनएस)। कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला पर्यटन जोन में उत्तराखंड के प्रधान वन संरक्षक ने घास के मैदान के सुधार का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य की प्रगति पर संतोष जताया। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में वन्यजीवों के विचरण के लिए बने चौड़ में अनावश्यक वनस्पति बढऩे से वन्यजीव चारे के लिए आसपास के इलाके की वनस्पति पर निर्भर होने लगे हैं जिसके चलते आबादी क्षेत्र में मानव वन्यजीव संघर्ष/सुरक्षा का खतरा बढ़ रहा है। कार्बेट के ढिकाला में इन दिनों चौड़ सुधार का कार्य चल रहा है। मैदान में वन्यजीवों के विचरण व चारे के लिए सही गुणवत्ता की घास मिले इसके लिए वन विभाग प्रथम चरण में अनुपयुक्त वनस्पति को हटा रहा है। वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक इस मैदान का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बाद वन विभाग इस पर तेजी से काम कर रहा है। उत्तराखंड के प्रधान वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र दो दिन पूर्व कार्बेट के ढिकाला पहुंचे। अधिकारियों से मैदानों के सुधार पर विचार-विमर्श करते हुए कार्य की प्रगति को देखा। उन्होंने कार्य पर संतोष जताते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरान कार्बेट के निदेशक व मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला, उपनिदेशक राहुल मिश्रा व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। ढिकाला से कालागढ़ होकर प्रधान वन संरक्षक देहरादून के लिए रवाना हो गए।
लैंटाना, मरोड़ फली व पार्थेनियम को हटाया जा रहा: कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया प्रथम चरण में घास के मैदानों में से लैंटाना, मरोड़ फली व पार्थेनियम (गाजर घास) को हटाया जा रहा है। यह कार्य लगभग 90 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। इन वनस्पति के हट जाने से मैदानों की घास वन्यजीवों के लिए उपयुक्त होगी।
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