भारतीय योग परंपरा में शरीर की वृद्धि और ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण आसनों का वर्णन मिलता है, जिनमें मलासन भी एक प्रभावी योगासन है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन और संतुलन बेहतर होता है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के साथ रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और शरीर के निचले हिस्से को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही, यह शरीर की सही मुद्रा और सांसों के साथ बेहतर तालमेल भी बनाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इसके अभ्यास को लेकर जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, यह स्क्वाट मुद्रा वाला योगासन है, जिसमें घुटनों को मोड़कर और कूल्हों को जमीन की ओर लाकर बैठा जाता है। इसे करने के लिए पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना फैलाकर धीरे-धीरे स्क्वाट की मुद्रा में आना चाहिए। मलासन की मुद्रा में छोटे-छोटे संतुलित कदमों के साथ शरीर को स्थिर रखा जाता है। यह आसन सुबह के समय खाली पेट करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है।
यह एक ऐसा योगासन है, जो शरीर को स्थिरता देता है और मन को एकाग्र रखने में मदद करता है। यह आसन मूलाधार चक्र को सक्रिय करता है, जिससे मन में सुरक्षा, संतुलन और जागरूकता की भावना बढ़ती है।
शारीरिक रूप से मलासन शरीर के कई हिस्सों को मजबूत और लचीला बनाता है। यह नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत करता है, वहीं कूल्हों, कमर, पीठ के निचले हिस्से और टखनों में खिंचाव लाकर अकडऩ कम करता है। लंबे समय तक बैठने से शरीर में जो जकडऩ आ जाती है, उसे दूर करने में भी यह आसन मददगार होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने वाला एक बेहतरीन अभ्यास माना जाता है। हालांकि, उन्हें इसका अभ्यास करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करना चाहिए।
गंभीर घुटने, टखने या पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या वाले लोगों को इससे बचना चाहिए। यदि हाल ही में पेट या कूल्हे की कोई सर्जरी हुई हो, तो भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
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