दुर्ग, 22 मई (आरएनएस)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में बाल संप्रेषण गृह दुर्ग में निवासरत बालकों को कक्षा 7वीं, 10वीं, 11वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही थी। बच्चों को अध्ययन सामग्री एवं शिक्षकों की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। कठिन पारिवारिक, सामाजिक एवं मानसिक परिस्थितियों के बावजूद बच्चों ने हार नहीं मानी और निरंतर अध्ययन जारी रखा।
इन बच्चों की मेहनत एवं लगन यह संदेश देती है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। अनुशासन एवं नियमित अध्ययन से बच्चों में आत्मविश्वास का विकास हुआ है तथा यह सिद्ध हुआ है कि सतत् प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बच्चों की इस सफलता ने यह प्रमाणित किया है कि यदि प्रत्येक बच्चे को उचित अवसर एवं सकारात्मक वातावरण मिले, तो वह नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है। परीक्षा की तिथि निकट आने पर बालकों को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति हेतु आवेदन किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बच्चों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 7 बच्चों को परीक्षा में सम्मिलित होने अनुमति प्रदान की गई थी, जिसमें से 6 बच्चों ने सफलतापूर्वक परीक्षा उत्तीर्ण की। बच्चों की इस उपलब्धि से संस्था में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। शिक्षा प्राप्त कर बालक अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं तथा खेल, कला, संगीत एवं अन्य गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा का विकास कर सकते हैं। साथ ही वे समाज के अन्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर सकते हैं, आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं तथा कंप्यूटर, तकनीकी एवं नवाचार आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार के नए अवसर भी हासिल कर सकते हैं। बच्चों की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा जीवन को बदलने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे अन्य बच्चों में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता एवं गंभीरता बढ़ेगी।
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