नई दिल्ली,24 मई (आरएनएस)। इस साल के संसद रत्न पुरस्कारों के लिए 12 सांसदों और चार संसदीय समितियों का चयन किया गया है. निजी संगठन ‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशनÓ ने एक बयान में बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जगदंबिका पाल (उत्तर प्रदेश), पी. पी. चौधरी (राजस्थान), निशिकांत दुबे (झारखंड) और शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे (महाराष्ट्र) पुरस्कारों के लिए व्यक्तिगत श्रेणी में चुने गए सांसदों में शामिल हैं. संसद रत्न पुरस्कार प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन द्वारा प्रदान किये जाते हैं, न कि भारत सरकार द्वारा.
बयान के अनुसार, प्रवीण पटेल (उत्तर प्रदेश), विद्युत बरन महतो (झारखंड), लुम्बाराम चौधरी (राजस्थान), हेमंत विष्णु सवरा (महाराष्ट्र), स्मिता उदय वाघ (महाराष्ट्र), नरेश गणपत म्हस्के (महाराष्ट्र), मेधा विश्राम कुलकर्णी (महाराष्ट्र) और नरहरि अमीन (गुजरात) को इस साल बजट सत्र के अंत तक संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा.
चार संसदीय समितियों को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण पुरस्कार के लिए चुना गया है. इनमें चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली कृषि समिति, भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त समिति, सप्तगिरि शंकर उलाका की अध्यक्षता वाली ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति और अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली कोयला एवं खान समिति शामिल हैं.
आपको बता दें कि संसद रत्न पुरस्कारों की स्थापना 2010 में की गई थी. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सांसदों को सम्मानित करने के लिए इसकी स्थापना की गई थी. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के सुझाव पर इस पुरस्कार की शुरुआत की गई थी. उनका कहना था कि जो सांसद अच्छा करते हैं, जो बिना किसी बाधा के बहसों और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, उन्हें नागरिक समाज द्वारा मान्यता मिलनी चाहिए.
स्थापना के बाद से संसद रत्न पुरस्कार पारदर्शिता और संसदीय उत्कृष्टता की एक प्रतिष्ठित संस्था के रूप में विकसित हुए हैं. फाउंडेशन ने अब तक व्यक्तिगत सांसदों और संसदीय समितियों सहित कुल 143 पुरस्कार प्रदान किए हैं. इन पुरस्कारों को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्राप्त है.
इस साल उन सांसदों को पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाई है और उन्होंने शासन व्यवस्था को काफी करीब से देखा है. इस सूची में जगदंबिका पाल और चरणजीत सिंह चन्नी पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. गुजरात के नरहरि अमीन पूर्व उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
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