0-जनजातीय संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर : विष्णुदेव साय
नई दिल्ली , 24 मई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज ऐतिहासिक लाल किला मैदान पहुंचे, जहां राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम का भव्य आयोजन किया गया। देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय मुलाकात की और उनके साथ पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत और शिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है। इनकी जीवनशैली, संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं, जो प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने हमेशा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक वीर आदिवासी नायकों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण के दौर में अपनी जड़ों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आदिवासी कला, संस्कृति, बोली-भाषा और परंपरागत ज्ञान को संरक्षित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी मातृभाषा और लोकसंस्कृति पर गर्व करें और उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप एवं आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम भी मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ की ओर से यहां गोंड, हल्बा, भुंजिया, बिंझवार और कमार जनजातियों के कलाकारों ने लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। समागम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। दोनों नेताओं ने जनजातीय कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े विषयों पर चर्चा की। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में रह रहे आदिवासी समुदायों के लिए सांस्कृतिक मंच उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने समागम में लगे आदिवासी हाट का भी दौरा किया, जहां बांस-शिल्प, धातु कला, माटी के बर्तन और पारंपरिक वस्त्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। उन्होंने शिल्पकारों से बातचीत कर उनके उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की और बाजार उपलब्धता बढ़ाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जनजातीय गौरव दिवस, एकलव्य विद्यालय, वन धन केंद्र और पीएम जनमन जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी बस्तर, सरगुजा और जशपुर के आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी जनजातीय कलाकारों और प्रतिनिधियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह समागम न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच है, बल्कि देश की विविधता में एकता का भी प्रतीक है।
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