नई दिल्ली,24 मई (आरएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को संकेत दिया कि ईरान से जुड़े मौजूदा राजनयिक प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ एक समझौते को लेकर जल्दी ही कोई घोषणा हो सकती है. रुबियो ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई भी संभावित सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान चर्चा के तहत प्रस्तावित ढांचे को स्वीकार करे और उसका पालन करे. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ पत्रकारों को संबोधित करते हुए, रुबियो ने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर आगे की घोषणाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की जा सकती हैं.
रुबियो ने कहा, हमारा मानना है कि हमने एक ऐसी रूपरेखा पर कुछ प्रगति की है, जो अगर काम कर गई, तो हमें वह परिणाम दे सकती है. उन्होंने आगे कहा, यह कहना काफी होगा कि कुछ प्रगति हुई है, महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, हालांकि यह अंतिम प्रगति नहीं है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी समझौते के लिए ईरान की पूरी स्वीकृति और फिर उसका पालन आवश्यक होगा.
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. ईरान अभी जो कर रहा है, वह मूल रूप से एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का उपयोग करने वाले व्यापारिक जहाजों को नष्ट करने की धमकी देना है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून की किसी भी परिभाषा के तहत अवैध है.
खाड़ी देशों के साथ चल रहे राजनयिक तालमेल पर जोर देते हुए रुबियो ने कहा कि हालिया प्रयासों का मुख्य फोकस इस रणनीतिक जलमार्ग से सुरक्षित और मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करना रहा है. उन्होंने कहा, पिछले 48 घंटों में खाड़ी क्षेत्र के हमारे सहयोगियों के साथ एक रूपरेखा पर कुछ प्रगति हुई है. अगर यह प्रयास सफल रहा, तो अंतत: होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला रहेगा और मेरा मतलब बिना किसी टैक्स (टोल) के पूरी तरह खुले जलमार्ग से है.
रुबियो ने आगे कहा कि अंतिम लक्ष्य अभी भी यही सुनिश्चित करना है कि दुनिया को फिर कभी ईरान के परमाणु हथियार के खतरे का सामना न करना पड़े. इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जो मौजूदा उच्च-स्तरीय भारत-अमेरिका राजनयिक बातचीत की एक महत्वपूर्ण कड़ी है.
इस बैठक में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. जयशंकर के साथ विदेश मंत्रालय (रूश्व्र) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जबकि रुबियो के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और उनके साथ आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य शामिल थे.
बैठक के दौरान, रुबियो ने अपनी यात्रा के पहले दिन को शानदार बताया और इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका केवल सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी (स्ट्रैटेजिक एलाइज) हैं. उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी ही भारत-अमेरिका संबंधों को सबसे अलग बनाती है. उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसरों तक फैली हुई है.
उन्होंने भारत और अमेरिका को दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र बताया. उन्होंने कहा कि केवल यही बात शानदार सहयोग के लिए एक बुनियाद है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान यात्रा का उद्देश्य उस रणनीतिक साझेदारी को लगातार आगे बढ़ाना है जो पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत है. शनिवार को नई दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी.
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