देवास 26 मई (आरएनएस)। बहुचर्चित गणेश उर्फ गन्नू भावसार हत्याकांड में कोर्ट ने चार आरोपियों को मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि मामले में चश्मदीद गवाह सहित कई मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच, अभियोजन की रणनीति और मीडिया में सामने आए वीडियो इंटरव्यू ने आरोपियों को सजा तक पहुंचा दिया।
कोर्ट ने आरोपी मिथुन अहीरवाल, रवि चौहान, राजकुमार सिसोदिया और अजय उर्फ आकाश सिसोदिया को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास और 26 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामला 22 जुलाई 2022 का है। थाना औद्योगिक क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के अनुसार, रंगपंचमी पर हुए विवाद की रंजिश आरोपियों ने करीब चार महीने तक मन में रखी। इसके बाद गणेश उर्फ गन्नू भावसार पर चाकू, तलवार और डंडों से हमला कर दिया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने इसकी लगातार निगरानी की।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब चश्मदीद और अन्य मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकरने लगे, तब पुलिस और अभियोजन टीम ने नई रणनीति बनाई। घटना के दौरान जुटाए गए सबूतों का दोबारा डीएनए टेस्ट कराया गया।
इसी दौरान पुलिस ने चश्मदीद गवाह का पुराना मीडिया इंटरव्यू भी तलाश निकाला, जिसमें उसने घटना का जिक्र किया था। मीडिया कर्मियों के बयान और वीडियो को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया गया। बाद में जब गवाह दोबारा बयान देने पहुंचा तो वह वीडियो को झूठा साबित नहीं कर सका। डीएनए रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्य इस मामले में सजा का मजबूत आधार बने।
पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने बताया कि ऑपरेशन संकल्प के तहत देवास पुलिस वैज्ञानिक और पेशेवर जांच पर लगातार काम कर रही है। इसी का परिणाम है कि हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलात्कार, छेड़छाड़, धोखाधड़ी और चोरी जैसे मामलों में आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि गवाहों के मुकरने की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारियों और अभियोजन टीम ने बैठक कर विशेष रणनीति बनाई थी।

