दुर्ग, 27 मई (आरएनएस)। कंपनी डायरेक्टर की फोटो लगाकर व्हाट्सएप पर ऐसा जाल बिछाया गया कि देखते ही देखते 20 लाख रुपये साइबर ठगों के खातों में पहुंच गए, लेकिन दुर्ग पुलिस ने होटल बदल-बदलकर छिप रहे राजस्थान के अंतर्राज्यीय गैंग को आखिरकार रायपुर में घेरकर धर दबोचा। दुर्ग जिले के थाना सुपेला में दर्ज अपराध क्रमांक 712/2026 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी करने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रार्थी यश बत्रा निवासी सुंदर नगर भिलाई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी साईराम व्हील्स प्रायवेट लिमिटेड के बैंक खाते से कंपनी डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाई गई और अकाउंटेंट को झांसे में लेकर 20 लाख रुपये एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाकर और खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर नकद निकालते थे। आरोपी व्हाट्सएप और जंगी ऐप के जरिए टोकन सिस्टम से पैसों का लेनदेन करते थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग के निर्देशन में थाना सुपेला और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने तकनीकी निगरानी, बैंक खातों के विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर रायपुर में घेराबंदी की।
आरोपी लगातार होटल बदल रहे थे और बूढ़ा तालाब इलाके में किराए का मकान तलाश रहे थे ताकि छिपकर साइबर ठगी जारी रख सकें। पुलिस ने पंकज शर्मा सहित आरोपियों को रायपुर जयस्तंभ चौक और आसपास के क्षेत्रों से पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मुरली जनागल पिता आशुराम जनागल उम्र 19 वर्ष निवासी अमरपुरा थाना गंगाशहर जिला बीकानेर राजस्थान, गोपाल सोनी पिता मदनमोहन सोनी उम्र 25 वर्ष निवासी चीपड़ाबाड़ी थाना गंगाशहर जिला बीकानेर राजस्थान, मोती सिंह पिता नरेन्द्र सिंह उम्र 18 वर्ष निवासी सोइरा शेरगढ़ थाना शेरगढ़ जिला जोधपुर राजस्थान, मोतीलाल शर्मा पिता गोपीकिशन शर्मा उम्र 18 वर्ष निवासी बापीनी थाना पतोड़ा जिला जोधपुर राजस्थान, बनवारी शर्मा पिता रामेश्वरलाल शर्मा उम्र 28 वर्ष निवासी गंगाशहर बाफना स्कूल के सामने जिला बीकानेर राजस्थान और पंकज शर्मा पिता अण्डभद्रा राव उम्र 24 वर्ष निवासी थाना लोहावट जिला जोधपुर राजस्थान शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपये नगद, 6 मोबाइल, 10 एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड और बैंक दस्तावेज जब्त किए गए। बहरहाल, दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि डिजिटल ठगी करने वाले अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी दिखाएं, तकनीकी जांच और पुलिस की सतर्कता से ज्यादा दिन तक बच नहीं सकते।
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