दुर्ग, 27 मई (आरएनएस)। महिलाओं को उचित अवसर, मार्गदर्शन एवं सहयोग मिले, तो वे आत्मनिर्भर बनकर परिवार एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। आज गांव में महिलाएं सशक्तिकरण की मिशाल बन चुकी हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड पाटन, ग्राम पंचायत चंगोरी की निवासी यामिनी वर्मा दीदी जागृति स्व-सहायता समूह की एक सक्रिय सदस्य बन चुकी है। उनके समूह में कुल 11 सदस्य हैं। समूह से जुडऩे के बाद यामिनी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया और उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। समूह से जुडऩे से पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई होती थी। समूह से जुडऩे के बाद प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन के माध्यम से उन्हें नई जानकारी प्राप्त हुई। समूह से प्राप्त आरएफ एवं सीआईएफ राशि से उन्होंने पशुपालन एवं नर्सरी व्यवसाय प्रारंभ किया।
पशुपालन विभाग के माध्यम से उन्हें दो गाय प्राप्त हुए, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 70 हजार रुपये हैं। विभाग द्वारा पशु देखभाल, टीकाकरण, चारा प्रबंधन एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने प्रशिक्षण भी दिया गया। वर्तमान में वे दूध, दही, छाछ एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की बिक्री कर प्रतिमाह लगभग 5 से 6 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही स्व-सहायता समूह के सहयोग से नर्सरी व्यवसाय भी प्रारंभ की। वे फलदार, फूलदार एवं सजावटी पौधों का उत्पादन कर आसपास के गांवों में बिक्री कर रही है। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। पशुपालन एवं नर्सरी व्यवसाय से उनकी कुल मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बच्चों की पढ़ाई बेहतर हुई तथा घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति सहज हो गई। अब यामिनी वर्मा दीदी गाँव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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