कोटद्वार,27 मई(आरएनएस)। कई साल से मरम्मत व डामर न होने से डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग (पुराना हरिद्वार मार्ग) बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित होने के दो साल बाद भी सड़क की स्थिति नहीं सुधरी है। स्थिति यह है कि डामर उखडऩे से कई जगहों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। मार्ग पर बने रपटे भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। लोग जोखिम में आवाजाही करने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासी लगातार मार्ग के डामरीकरण की मांग करते आ रहे हैं लेकिन संबंधित विभाग इसकी सुध नहीं ले रहा है।
वर्ष 2017 में पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार ने 8.5 किमी लंबे मार्ग का निर्माण कराया था। इसके बाद ध्रुवपुर में सुखरो नदी व सत्तीचौड़ स्थित ग्वालगढ़ गदेरे में दो डबल लेन स्पान पुलों का निर्माण भी हुआ। पांच साल तक मार्ग का अनुरक्षण कार्य पीएमजीएसवाई ने किया। वर्ष 2023 में सड़क निर्माण को पांच साल पूरा होने के बाद शासन के निर्देश पर इसे लोनिवि दुगड्डा को हस्तांतरित कर दिया गया। तब बरसात से खस्ताहाल हुए मार्ग पर पैच वर्क कराकर इतिश्री कर दी गई।वर्तमान में देखरेख के अभाव में मार्ग खस्ताहाल है। स्थिति यह है कि ध्रुवपुर स्थित सुखरो पुल और सत्तीचौड़ के बीच दो रपटों का एक-एक हिस्सा क्षतिग्रस्त है। वहीं, डिग्री कॉलेज और ध्रुवपुर पुल के बीच कई जगहों पर डामर उखडऩे से मार्ग पर गहरे गड्ढे हो गए हैं जिससे मार्ग पर आवाजाही करना मुश्किल हो गया है।मार्ग से शिवपुर, लालपुर, ध्रुवपुर, सत्तीचौड़, मवाकोट और भाबर के लोग आवाजाही करते हैं। नींबूचौड़-भाबर मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक होने के कारण भाबर क्षेत्र की जनता वर्षों से पुराने हरिद्वार मार्ग (डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग) को वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने की मांग कर रही है। शिवपुर निवासी दिनेश जुयाल, संजय सिंह, अशोक कुमार आदि ने बताया कि मार्ग की हालत काफी खराब है।
डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग के डामरीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। जल्द ही इस मार्ग का डामरीकरण कराया जाएगा। – कंचन मुयाल, एई लोनिवि दुगड्डा।
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