उत्तरकाशी,27 मई(आरएनएस)। जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु सीधे यमुनोत्री धाम पहुंचकर दर्शन कर लौट जाते हैं वहीं गुजरात के मिनेश भारवाड पिछले छह वर्षों से एक अलग आस्था की मिसाल पेश कर रहे हैं। गोधरा निवासी मिनेश जेठा भाई भारवाड के लिए मां यमुना का असली आध्यात्मिक सुकून सिर्फ धाम तक सीमित नहीं बल्कि मां के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में बसे प्राचीन यमुना मंदिर में मिलता है। मिनेश हर वर्ष परिजनों और रिश्तेदारों के साथ यमुनोत्री पहुंचते हैं, लेकिन यात्रा का सबसे विशेष पड़ाव खरसाली गांव ही होता है। यहां वे 11 पुरोहितों के साथ विधिवत विशेष पूजा अर्चना कराते हैं और घंटों तक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल रहते हैं। यमुना मंदिर के पुरोहित विपिन उनियाल और पुजारी मनमोहन उनियाल बताते हैं कि गुजरात से आने वाले यह श्रद्धालु खरसाली की आध्यात्मिक शांति, पारंपरिक पूजा पद्धति और गांव की दिव्यता से इतने प्रभावित हैं कि हर साल यहां आना अपनी आस्था का अहम हिस्सा मानते हैं।
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