बागेश्वर 29 मई (आरएनएस)। दयोलीडांना शताब्दी समारोह समिति अल्मोड़ा और आंबेडकर जयंती समारोह समिति के संयोजक संजय कुमार टम्टा ने मुंशी हरिप्रसाद टम्टा धर्मशाला, अल्मोड़ा को संग्रहालय घोषित करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा उत्तराखंड के शिल्पकार समाज के महानायक, समाज सुधारक और जननेता थे। सामाजिक न्याय, समानता और वंचित समाज के उत्थान में उनके ऐतिहासिक योगदान के कारण उन्हें उत्तराखंड का अंबेडकर कहा जाता है। बताया कि अल्मोड़ा नगर में निर्मित यह धर्मशाला वर्ष 1950-60 के दशक में कुमाऊं-गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले निर्धन यात्रियों, मजदूरों, विद्यार्थियों और शिल्पकार समाज के लोगों के लिए नि:शुल्क आश्रय स्थल हुआ करती थी।
यह भवन केवल धर्मशाला नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा, समानता और मानवता का प्रतीक रहा है। संजय टम्टा ने कहा कि लंबे समय तक उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में भवन जर्जर हो गया था। इसके पुनर्निर्माण के लिए समाज के लोगों ने लगातार संघर्ष किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने धनराशि उपलब्ध कराई और धर्मशाला का पुनर्निर्माण संभव हो सका। नगर निगम अल्मोड़ा द्वारा धर्मशाला को किराए पर देने के लिए जारी विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसका व्यावसायिक उपयोग मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की मूल भावना, उद्देश्य और सामाजिक विचारधारा के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संग्रहालय के रूप में विकसित कर समाज सुधार और शिल्पकार समाज के संघर्षों की विरासत को संरक्षित किया जाए।
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