सरगुजा 30 मई (आरएनएस) सिर्फ 5 हजार रुपये के लालच में अपने बैंक खाते बेचने वाले दो युवकों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके खाते देशभर में फैले साइबर अपराधियों का हथियार बन चुके हैं, लेकिन सरगुजा पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। थाना गांधीनगर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। दोनों खातों के खिलाफ कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, तेलंगाना और उत्तरप्रदेश जैसे कई राज्यों से ऑनलाइन शिकायतें दर्ज थीं। डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में सरगुजा पुलिस लगातार म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम और साइबर अपराध से जुड़े मामलों पर कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में थाना गांधीनगर पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा के खाता क्रमांक 80280200002383 के धारक गुफरान जाहिद पिता मोहम्मद परवेज आलम, उम्र 32 वर्ष, निवासी तकिया शरीफ, रनपुरखुर्द, थाना कोतवाली अंबिकापुर, जिला सरगुजा के खाते में संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन और विभिन्न राज्यों से साइबर शिकायतें दर्ज होना पाया गया। पूछताछ में गुफरान जाहिद ने अपना बैंक खाता 5 हजार रुपये में दूसरे व्यक्ति को बेचने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया और अपराध क्रमांक 252/2026 में धारा 318(4), 317(4) बीएनएस के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा के खाता क्रमांक 59210200000274 के धारक तजमुल अंसारी पिता परवेज अंसारी, उम्र 25 वर्ष, निवासी तकिया शरीफ रनपुरखुर्द, थाना कोतवाली अंबिकापुर, जिला सरगुजा के खिलाफ भी कई राज्यों से साइबर पुलिस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज मिलीं। जांच में सामने आया कि उसके खाते में भी ऑनलाइन माध्यम से विभिन्न संदिग्ध रकम प्राप्त हुई थीं। थाना गांधीनगर पुलिस ने तजमुल अंसारी को तलब कर पूछताछ की, जहां उसने भी 5 हजार रुपये में अपना बैंक खाता बेचने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर अपराध क्रमांक 253/2026 में धारा 318(4), 317(4) बीएनएस के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह, विकास सिंह और ऋषभ सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बहरहाल, सरगुजा पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश है कि साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है और कुछ हजार रुपये की लालच किसी को भी सीधे जेल तक पहुंचा सकती है।


