दुर्ग, 30 मई (आरएनएस)। नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि सहकारी समितियों द्वारा किसानों को नैनो उर्वरक लेने के लिए किसी भी प्रकार से बाध्य न किया जाए। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें अपनी कृषि आवश्यकताओं एवं फसल की जरूरतों के अनुसार उर्वरक चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कुछ सोसाइटियों में किसानों पर पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो उर्वरक लेने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि ऐसी शिकायतें सही हैं तो यह किसानों के हितों के विपरीत है और तत्काल इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक आधुनिक कृषि तकनीक का हिस्सा हैं और इनके उपयोग से संबंधित अनेक सकारात्मक दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी भी नई तकनीक या उत्पाद को अपनाने का निर्णय किसान स्वयं अपनी आवश्यकता, अनुभव और विशेषज्ञ सलाह के आधार पर करें। किसी भी प्रकार की अनिवार्यता किसानों की स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग का दायित्व किसानों को जागरूक करना है न कि उन पर किसी उत्पाद को खरीदने का दबाव बनाना। किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभ,उपयोग की विधि,लागत और परिणामों की सही जानकारी देकर स्वैच्छिक रूप से निर्णय लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि कई छोटे एवं सीमांत किसान सीमित संसाधनों के साथ खेती करते हैं। ऐसे में यदि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है तो इससे उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। डॉ. प्रतीक उमरे ने कलेक्टर अभिजित सिंह से आग्रह किया है कि सभी सोसाइटियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि उर्वरकों के वितरण के दौरान किसानों पर किसी प्रकार का दबाव न बनाया जाए। यदि किसी समिति या कर्मचारी द्वारा किसानों को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य करने की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
0
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

