जशपुर 30 मई (आरएनएस) पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता पर जशपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरक्षकों पर कड़ा प्रहार किया है। लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने, बार-बार अवसर मिलने के बावजूद सुधार नहीं करने और सेवा नियमों की लगातार अनदेखी करने वाले पांच आरक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी होने के बाद अंतिम आदेश जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई में तीन आरक्षकों को सीधे सेवा से पृथक कर दिया गया, जबकि दो अन्य को कठोर वित्तीय दंड दिया गया है।
विभागीय जांच में सामने आया कि आरक्षक क्रमांक 737 संतोष कुमार राम अपनी 13 वर्ष की सेवा में 33 बार कुल 469 दिनों तक गैरहाजिर रहा। उसे पूर्व में 23 दंड और 9 इनाम मिल चुके थे, फिर भी आचरण में सुधार नहीं हुआ। आरक्षक क्रमांक 525 नेल्सन तिग्गा 17 वर्ष की सेवा में 28 बार कुल 923 दिनों तक अनुपस्थित रहा और उसे पहले ही 27 बार दंडित किया जा चुका था। वहीं आरक्षक क्रमांक 394 अशोक कुमार एक्का 20 वर्षों की सेवा में 30 बार कुल 1151 दिनों तक गैरहाजिर पाया गया। तीनों को विभागीय जांच उपरांत सेवा से पृथक कर दिया गया।
इसके अलावा आरक्षक क्रमांक 47 इरीमियस कुजूर को 139 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति के मामले में एक वेतन वृद्धि के बराबर धनराशि की कमी संचयी प्रभाव से दंडित किया गया। वहीं आरक्षक क्रमांक 144 बिंदेश्वर राम, जो 216 दिनों तक गैरहाजिर रहा, उसे आरक्षक के न्यूनतम वेतनमान पर लाने का दंड दिया गया, जिसका प्रभाव भविष्य की वेतन वृद्धि और पेंशन पर भी पड़ेगा।
पुलिस रेगुलेशन 221(अ), छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन 64(2) और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन पर की गई इस कार्रवाई को जशपुर पुलिस विभाग में अब तक की सबसे सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में माना जा रहा है। डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट कहा है कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बहरहाल, इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है और कर्तव्य से भागने वालों के लिए अब विभाग में कोई नरमी नहीं होगी।

