महासमुंद 30 मई (आरएनएस)। किसानों की मेहनत की फसल और सरकारी योजनाओं की राशि पर करोड़ों रुपये के घोटाले का बड़ा मामला महासमुंद जिले में सामने आया है। नरसैयापल्लम धान उपार्जन केंद्र में हजारों कट्टे धान गायब मिलने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्र प्रभारी महेन्द्र प्रधान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि किसानों के हक के 3,642.72 क्विंटल यानी 9,107 कट्टे धान का हिसाब नहीं मिला, जिसकी समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना की राशि मिलाकर कुल कीमत 1 करोड़ 12 लाख 92 हजार 432 रुपये आंकी गई है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित पिरदा के शाखा प्रबंधक उसत कुमार प्रधान ने थाना बसना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 16 मई 2026 को प्रशासनिक जांच दल द्वारा धान उपार्जन केंद्र नरसैयापल्लम का भौतिक सत्यापन किया गया था। जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया और 3,642.72 क्विंटल धान कम मिला। प्रारंभिक जांच में यह राशि गबन का मामला सामने आने पर पुलिस ने तत्काल अपराध क्रमांक 287/2026 दर्ज कर धारा 316(5) बीएनएस के तहत विवेचना शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने धान उपार्जन केंद्र प्रभारी महेन्द्र प्रधान पिता रूपधर प्रधान, उम्र 57 वर्ष, निवासी जबलपुर एवं वर्तमान प्रभारी नरसैयापल्लम केंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अब इस पूरे घोटाले में अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। गौरतलब है कि किसानों के हक की राशि और धान में गड़बड़ी के इस बड़े मामले ने खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरहाल, महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी संपत्ति और किसानों के अधिकारों पर डाका डालने वालों को अब कानून से बचना आसान नहीं होगा।


