रायगढ़ 1 जून (आरएनएस) आईपीएल फाइनल की चमक के पीछे चल रहे करोड़ों के सट्टा खेल पर पुलिस ने ऐसा प्रहार किया कि पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया। “ऑपरेशन अंकुश” के तहत रायगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 31 लाख 99 हजार 700 रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और नोट गिनने की मशीन जब्त की है। इस कार्रवाई में दो सटोरियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना और खरसिया चौकी की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि खरसिया के गंज बाजार क्षेत्र में आईपीएल फाइनल GT बनाम RCB मैच पर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा है। सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा और एसडीओपी प्रभात पटेल के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित कर एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान गंज बाजार से गगन अग्रवाल (28) और शुभम अग्रवाल उर्फ कालू (30) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दोनों ने क्रिकेट सट्टा संचालित करना स्वीकार किया और रिकेश राय, अर्जुन राठौर तथा साहिल अग्रवाल के साथ मिलकर पूरे सिंडिकेट को संचालित करने की जानकारी दी।
जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से वनप्लस नॉर्ड और सैमसंग गैलेक्सी मोबाइल बरामद हुए, जिनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े तकनीकी साक्ष्य मिले। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस गोपाल राइस मिल कॉलोनी स्थित साहिल अग्रवाल के घर पहुंची, लेकिन पुलिस वाहन देखते ही वह दो बैग और नोट गिनने की मशीन छोड़कर फरार हो गया। बैगों की तलाशी में 500, 200, 100 और 50 रुपये के नोटों सहित कुल 31.99 लाख रुपये नकद बरामद हुए। रकम के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
प्रारंभिक जांच में संगठित गिरोह बनाकर ऑनलाइन सट्टा संचालन की पुष्टि होने पर गगन अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, रिकेश राय, अर्जुन राठौर और साहिल अग्रवाल के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि गिरफ्तार आरोपी गगन अग्रवाल का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और मार्च 2026 में भी उस पर ऑनलाइन सट्टे के मामले में कार्रवाई हो चुकी है।
बहरहाल, रायगढ़ पुलिस का साफ संदेश है—ऑनलाइन सट्टे की दुनिया चाहे कितनी भी डिजिटल क्यों न हो, “ऑपरेशन अंकुश” की पकड़ से बचना अब आसान नहीं होगा।


