बालाघाट 3 जून (आरएनएस)। मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, इकाई बालाघाट के तत्वावधान में देश के नामी शायर मरहूम पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र एवं मरहूम शायर जनाब अनुज तिवारी ‘गोविन्दÓ की स्मृति में “यादें…” श्रद्धांजलि एवं संस्मरणात्मक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम रविवार, 31 मई 2026 को सुप्रसिद्ध गीतकार श्री ब्रजेश हजारी के निवास, पवार मंगल भवन के पीछे, बालाघाट में उन्हीं की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दिवंगत अनुज गोविन्द जी की दीदी श्रीमती नीलिमा तिवारी जी (सेवानिवृत्त महिला एवं बाल विकास अधिकारी) रहीं।
गोष्ठी की परिकल्पना, सूत्रधार एवं संचालन कविवर श्री कुंजकिशोर विरुरकर, जिला अध्यक्ष म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन बालाघाट, द्वारा दोनों ही शायरों की बेहतरीन यादों के साथ किया गया। अनुज गोविन्द जी के साथ जुड़े साहित्यकारों ने उनके साथ व्यतीत किए पलों को साझा करते हुए गीत, गज़़ल के माध्यम से कविता पाठ किया तथा दोनों दिवंगत शायरों के जीवनवृत्त पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर बतौर प्रमुख अतिथि ‘सहमतÓ के प्रमुख एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री राजेंद्र सहज, गोंदिया-आमगांव से नामी शायर श्री असीम आमगांवीं, गीतकार व नाट्य निदेशक श्री अशोक सागर, शायर-गीतकार डॉ. किशोर सोनवने ‘अनीशÓ, व्यंग्यकार श्री सुन्दर सुलभ, श्री चंद्रेश तूफानी, कवि श्री साहेबलाल सरल, व्यंग्य कवि श्री शैलेश ‘शैलÓ, श्री मनोज रामटेके, श्री लक्ष्मीचंद ठाकरे, कवि श्री किशोर सागर, गीतकार श्री प्रदीप दर्शन, कवयित्री श्रीमती नीलम हजारी, शिक्षिका श्रीमती प्रेमलता शैल सहित नगर के अनेक प्रबुद्ध साहित्यकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री ब्रजेश हज़ारी जी, श्री लक्ष्मीचंद ठाकरे एवं श्री किशोर छिपेश्वर जी का विशेष सहयोग रहा।
व्यंग्य कवि श्री शैलेश ‘शैलÓ ने अपनी कलम से श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा:
उतारे अदब का कजऱ्ा, यें जिम्मेदारी हमी पर हैं
क्या आसमान को मालूम था के गज़़ल के दो सितारें जमीं पर हैं..
नजऱों से नज़ारे गायब हो गए, आँखे उनकी याद में नमी पर हैं
मुशायरों की रौनक चली गई, माहौल शाद का गमी पर हैं
अशआर का रोना और शेर अश्कों में सराबोर हैं
तमाम महफिलों में चर्चा डॉ. बशीर-अनुज की खल रहीं कमी पर हैं…..
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र एवं अनुज तिवारी ‘गोविन्दÓ हिंदी-उर्दू अदब के दो चमकते सितारे थे जिनकी कमी साहित्य जगत में हमेशा खलेगी। यह गोष्ठी उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करने का विनम्र प्रयास था।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

