वारासिवनी। ग्राम पंचायत मेंहदीवाड़ा में उस समय प्रशासनिक हलचल तेज हो गई जब जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सिंह सरसवार ने पंचायत का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पंचायत की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से लंबित विभिन्न समस्याओं और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं की जानकारी जिला पंचायत अध्यक्ष को दी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए श्री सरसवार ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल चर्चा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण नियमानुसार एवं समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पडऩा चाहिए।
श्री सरसवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिकायतों के समाधान में अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि ग्रामीणों के हितों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर जिला पंचायत पूरी गंभीरता के साथ कार्य करेगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष के इस औचक निरीक्षण से पंचायत अमले में हड़कंप की स्थिति रही, वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा और क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलेगी।
(कुरई)नेवरी नदी की छाती छलनी, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध रेत खनन?==
कुरई 3 जून (आरएनएस)। कुरई क्षेत्र में अवैध रेत खनन का कारोबार लगातार बेलगाम होता जा रहा है। क्षेत्र की जीवनदायिनी नेवरी नदी इन दिनों रेत माफियाओं के निशाने पर है। हालात यह हैं कि माफिया नदी की छाती चीरते हुए जोगीवाड़ा पुल, भूमका घाट से लेकर पेंच नदी तक खुलेआम रेत का उत्खनन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों के माध्यम से दिनदहाड़े रेत का परिवहन किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
ग्रामीणों का कहना है कि रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब नदी-नालों को तलाश-तलाश कर खनन कर रहे हैं। बादलपार चौकी क्षेत्र के जोगीवाड़ा घाट से पेंच नदी तक नेवरी नदी के प्राकृतिक स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा चुका है। लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से नदी का अस्तित्व और पर्यावरण दोनों खतरे में पड़ते नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में खुलेआम रेत का खनन और परिवहन हो रहा है तो खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या रेत माफियाओं को किसी का संरक्षण प्राप्त है या फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित रेत खनन से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है, भू-जल स्तर गिरता है और पुल-पुलियों सहित आसपास की संरचनाओं पर भी खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में नेवरी नदी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
*उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल*
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है अवैध रेत खनन?
दिनदहाड़े दौड़ रहे ट्रैक्टर और डंपर प्रशासन को क्यों नहीं दिख रहे?
क्या खनिज विभाग को अवैध उत्खनन की जानकारी नहीं है?
नेवरी नदी को बचाने के लिए कब होगी ठोस कार्रवाई?
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी रेत माफियाओं पर शिकंजा कसते हैं या फिर नेवरी नदी को यूं ही अवैध खनन की भेंट चढऩे दिया जाएगा।

