सारंगढ़-बिलाईगढ़ 4 जून (आरएनएस) कभी तिरपाल और मिट्टी की झोपड़ियों में जीवन गुजारने वाले परिवार आज पक्के घरों की चौखट पर खड़े हैं। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित सपेरा बस्ती के लोगों के लिए यह बदलाव किसी सपने के सच होने जैसा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का महादेव नगर सपेरा बस्ती पहुंचना सिर्फ एक प्रशासनिक दौरा नहीं, बल्कि उन परिवारों के संघर्ष और उम्मीदों को सम्मान देने वाला पल बन गया।
ग्राम भीखमपुरा की इस बस्ती में रहने वाले आदिवासी समुदाय के करीब 65 परिवार पिछले 35 से 40 वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में जीवन यापन कर रहे थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं उनके लिए दूर की चीज थीं। लेकिन राज्य सरकार की पहल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
सबसे अधिक जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री आवास, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वृद्धा पेंशन, महतारी वंदन योजना, पेयजल सुविधा, बोर खनन और नल कनेक्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। इतना ही नहीं, बस्ती तक पहुंचने के लिए सीसी सड़क और पक्की नाली का निर्माण भी कराया गया, जिससे लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।
मुख्यमंत्री ने बस्ती के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया। उन्होंने आवासों में सौर ऊर्जा सुविधा उपलब्ध कराने की भी बात कही, जिससे यह पहल सिर्फ आवास तक सीमित न रहकर आत्मनिर्भर और आधुनिक जीवन की ओर एक कदम बन सके।
बस्ती की महिलाओं के चेहरे पर महतारी वंदन योजना की राशि मिलने की खुशी है, बुजुर्गों को नियमित पेंशन का सहारा मिला है और हर परिवार के पास स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आयुष्मान कार्ड मौजूद है। जिन बच्चों ने वर्षों तक अभाव देखा, वे अब बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ बड़े हो रहे हैं।
यह पहल सिर्फ घर बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन देने की मिसाल है। जब शासन की योजनाएं सही लोगों तक पहुंचती हैं, तब बदलाव सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों की मुस्कान में दिखाई देता है।
सपेरा बस्ती की यह कहानी बताती है कि विकास का असली अर्थ वही है, जब समाज के सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक भी सुविधाओं की रोशनी पहुंचे और उसका जीवन उम्मीद से भर जाए।

