भोपाल 4 जून (आरएनएस)। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन प्रस्ताव को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जमीअत उलमा ने ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ करार दिया।
जमीअत उलमा जि़ला अध्यक्ष, हाफिज़़ इस्माईल बैग ने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन का मामला नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के एक बड़े नायक के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली ने 1915 में अफगानिस्तान में बनी भारत की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और विदेशी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।
बैग ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का नाम बदलना भोपाल की गंगा-जमुनी संस्कृति पर भी सीधा प्रहार है। एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटाने से समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी, कमजोर शोध व्यवस्था और खराब बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं।

