-नौतपा की भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे यात्री, सुलभ कॉम्प्लेक्स सूखा, यूरिनल से दुर्गंध, दीनदयाल रसोई प्रभावित; आम जनता के स्वास्थ्य और सम्मान के साथ खिलवाड़
अनूपपुर 5 जून (आरएनएस)। जिला मुख्यालय अनूपपुर का बस स्टैंड इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण बन गया है। नौतपा की भीषण गर्मी के बीच पिछले चार दिनों से बस स्टैंड की पेयजल व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। नगर पालिका द्वारा स्थापित जलापूर्ति पंप खराब होने के कारण यात्री पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसका असर केवल पेयजल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबों के भोजन और यात्रियों की गरिमा तक पर पडऩे लगा है।
प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक बसों का आवागमन और हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस बस स्टैंड में छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, मरीज और दूर-दराज़ से आने वाले यात्री सबसे अधिक परेशान हैं। हैरत की बात यह है कि यह स्थिति किसी दूरस्थ गांव की नहीं, बल्कि जिला कलेक्टर, नगर पालिका प्रशासक, नगरपालिका अध्यक्ष एवं पार्षद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मुख्यालय की है।
*जिला मुख्यालय में ही मूलभूत सुविधा का अभाव*
किसी भी जिले का बस स्टैंड उस जिले का प्रवेश द्वार माना जाता है। बाहर से आने वाले लोगों की पहली नजर इसी स्थान पर पड़ती है। लेकिन अनूपपुर बस स्टैंड की वर्तमान स्थिति जिले की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। चार दिनों तक पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा बहाल न हो पाना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं और जवाबदेही की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
*सुलभ कॉम्प्लेक्स में पानी नहीं, यात्रियों की गरिमा पर चोट*
बस स्टैंड स्थित नगर पालिका संचालित सुलभ कॉम्प्लेक्स भी पानी के अभाव में लगभग निष्प्रभावी हो चुका है। शौचालयों और स्नानगृहों में पानी न होने से यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से कष्टदायक है। स्वच्छता प्रभावित होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
*एकमात्र हैंडपंप भी गंदगी के बीच, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा*
पेयजल संकट के बीच लोगों के लिए केवल एक हैंडपंप ही सहारा बचा है, लेकिन उसकी स्थिति भी चिंताजनक है। हैंडपंप के आसपास गंदगी, कीचड़ और कचरे का अंबार लगा हुआ है। मजबूरी में यात्री उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां डायरिया, टाइफाइड, हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों को आमंत्रण दे सकती हैं। यह स्थिति सीधे-सीधे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के समान है।
*यूरिनल बना दुर्गंध और संक्रमण का केंद्र*
सुलभ कॉम्प्लेक्स के समीप बना सार्वजनिक यूरिनल भी पानी के अभाव में सफाई से वंचित है। नियमित धुलाई और सफाई न होने के कारण वहां से उठने वाली दुर्गंध पूरे बस स्टैंड परिसर में फैल रही है। यात्रियों और दुकानदारों का कहना है कि कुछ देर वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया है। गर्मी के कारण स्थिति और विकराल हो गई है। यह न केवल असुविधा बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
*दीनदयाल रसोई योजना भी हुई प्रभावित*
बस स्टैंड परिसर में संचालित दीनदयाल रसोई योजना, जिसके माध्यम से गरीबों और श्रमिकों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराया जाता है, वह भी जल संकट से प्रभावित हो गई है। भोजन निर्माण, बर्तन धुलाई और साफ-सफाई के लिए पानी न मिलने से योजना का संचालन बाधित हो गया है। इसका सीधा असर उन गरीब और जरूरतमंद लोगों पर पड़ रहा है जो इस योजना पर निर्भर हैं।
*जिला मुख्यालय का बस स्टैंड या उपेक्षा का प्रतीक?*
अनूपपुर बस स्टैंड की वर्तमान स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या यह वास्तव में किसी जिला मुख्यालय का बस स्टैंड है। एक बस स्टैंड में कम से कम स्वच्छ पेयजल, व्यवस्थित प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, सफाई और सुरक्षित वातावरण जैसी सुविधाएं अपेक्षित होती हैं। लेकिन यहां की वास्तविकता इसके विपरीत दिखाई देती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छोटे कस्बों के बस स्टैंडों में भी इससे बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। यात्रियों को पानी, स्वच्छता और सम्मानजनक वातावरण जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इससे विकास और सुशासन के दावों की वास्तविकता भी उजागर हो रही है।
*एक खराब पंप ने खोल दी पूरी व्यवस्था की पोल*
बस स्टैंड में जल संकट ने यह साबित कर दिया है कि एक मूलभूत सुविधा की अनदेखी कैसे पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। पेयजल बंद हुआ तो सुलभ कॉम्प्लेक्स प्रभावित हुआ, यूरिनल की सफाई रुक गई, हैंडपंप गंदगी के बीच लोगों की मजबूरी बन गया और गरीबों के भोजन की व्यवस्था तक बाधित हो गई।
यह मामला केवल एक खराब पंप का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता, जवाबदेही और प्राथमिकताओं का है। सवाल यह है कि जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त सार्वजनिक स्थल की यह स्थिति यदि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दे रही, तो फिर आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान की उम्मीद किससे की जाए?
*जनता की मांग*
नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यात्रियों ने जिला प्रशासन एवं नगर पालिका से तत्काल हस्तक्षेप कर पेयजल व्यवस्था बहाल करने, सुलभ कॉम्प्लेक्स एवं यूरिनल की नियमित सफाई सुनिश्चित करने, हैंडपंप क्षेत्र को स्वच्छ बनाने तथा बस स्टैंड की समस्त मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार हैं।

