जिले के समनापुर विकासखंड क्षेत्र का मामला
डिंडोरी 5 जून (आरएनएस)। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से गांव-गांव नल से जल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डिंडोरी जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई के हरिजन मोहल्ला और यादव टोला की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। यहां के ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि लोग झिरिया और नदी के दूषित पानी का उपयोग पीने और दैनिक जरूरतों के लिए कर रहे हैं। वर्षों से शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के प्रति भारी नाराजगी है।
जल संकट से जूझ रहा पूरा मोहल्ला
ग्राम पंचायत सरई के हरिजन मोहल्ला और यादव टोला में इन दिनों भीषण जल संकट व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत और प्रशासन की उपेक्षा के कारण वे विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। गांव के अन्य हिस्सों में कुछ हद तक जल सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन हरिजन मोहल्ला और यादव टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, पीएचई विभाग और जिला प्रशासन तक कई बार शिकायतें पहुंचाई हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। नतीजा यह है कि सैकड़ों ग्रामीण दूषित जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
जल जीवन मिशन से भी नहीं मिला लाभ
सरकार द्वारा शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। लेकिन सरई पंचायत के हरिजन मोहल्ला और यादव टोला के लोगों का आरोप है कि उनके क्षेत्र में आज तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा योजना के क्रियान्वयन में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया है। जिन परिवारों को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए था, उन्हें इससे दूर रखा गया। आज भी कई घर ऐसे हैं जहां नल कनेक्शन तो दूर, पानी की कोई नियमित व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीण सवाल उठाते हैं कि जब शासन की योजना पूरे गांव के लिए बनाई गई थी तो फिर उनके मोहल्ले को इससे क्यों वंचित रखा गया? आखिर किन कारणों से योजना का लाभ उन तक नहीं पहुंच पाया?
न हेडपंप, न कुआं, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत द्वारा वर्षों में न तो नए कुएं खुदवाए गए और न ही पर्याप्त संख्या में हेडपंप लगाए गए। जल संकट के बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने गंभीरता से इस समस्या का समाधान करने का प्रयास नहीं किया।
स्थिति यह है कि भीषण गर्मी के मौसम में अधिकांश पारंपरिक जल स्रोत सूख चुके हैं। ऐसे में लोगों के पास केवल दो झिरिया ही बची हैं, जिनमें रिसाव के माध्यम से धीरे-धीरे पानी एकत्रित होता है। यह पानी स्वच्छ नहीं है, लेकिन मजबूरी में ग्रामीण इसी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों के लिए कर रहे हैं।
दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
गांव में मौजूद झिरियों का पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पानी में मिट्टी, कचरा और अन्य अशुद्धियां मौजूद रहती हैं। इसके बावजूद महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घंटों इंतजार कर इसी पानी को भरने पर मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। एक-एक बर्तन पानी के लिए लोगों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है।
गोमती नदी भी नहीं दे पा रही राहत
ग्राम के बीच से बहने वाली गोमती नदी भी ग्रामीणों के लिए राहत का स्रोत नहीं बन पा रही है। ग्रामीणों के अनुसार नदी का पानी जंगल क्षेत्र से होकर आता है और इसमें विभिन्न प्रकार की गंदगी मिल जाती है। मवेशी भी इसी पानी का उपयोग करते हैं।
जल संकट के कारण कई ग्रामीणों को इसी नदी में स्नान करना पड़ता है और घरेलू कार्यों के लिए भी इसी पानी का उपयोग करना पड़ता है। इससे संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
बीमारी बढऩे की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने के कारण गांव में कई लोग बीमारियों से ग्रसित हैं। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पेट संबंधी रोग, त्वचा रोग और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
गांव के लोगों का कहना है कि यदि जल्द स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट भी गहरा सकता है।
शिकायतों के बाद भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग की है। आवेदन दिए गए, शिकायतें की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं करते। यही कारण है कि वर्षों बाद भी हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
जिम्मेदारों के बयान
मामले में ग्राम पंचायत सरई के सचिव जीवन लाल मरावी ने फोन पर बताया कि पंचायत स्तर पर टैंकर संचालन के लिए कोई प्रावधान नहीं है। वहीं पंचायत के रोजगार सहायक ने ऑफ कैमरा जानकारी देते हुए बताया कि हरिजन मोहल्ला और यादव टोला के लिए बोर खनन स्वीकृत हुआ था, लेकिन मशीन और वाहन वहां तक नहीं पहुंच पाए। इसके बाद बोर खनन अन्य स्थान पर करा दिया गया।
यह बयान कई सवाल खड़े करता है। यदि किसी क्षेत्र के लिए बोर स्वीकृत हुआ था तो फिर वहां तक पहुंचने की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? आखिर उस क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकार से क्यों वंचित किया गया?
बड़ा सवाल
जब सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, तब सरई पंचायत के हरिजन मोहल्ला और यादव टोला के लोग आज भी जल संकट से क्यों जूझ रहे हैं? आखिर क्यों स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उनके लिए सपना बनी हुई है? क्या प्रशासन और पंचायत इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे या फिर ग्रामीणों को आने वाले वर्षों तक भी दूषित पानी पीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा?
फिलहाल सरई पंचायत के हरिजन मोहल्ला और यादव टोला के लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें तत्काल स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए, बोर खनन और हेडपंप की व्यवस्था की जाए तथा जल जीवन मिशन का लाभ बिना भेदभाव के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।
इनका कहना हैं , , , ,
पिछली जनसुनवाई को ग्राम सरई समनापुर विकासखंड के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे जिनकी शिकायत पर हमने तत्काल पीएचई की टीम को मौके पर भेजा था एक हैंडपंप 200 मीटर की दूरी पर हैं जो वर्तमान में बंद पड़ा हुआ है मशीन हमारी बालाघाट से आ रही है कोशिश कर रहे हैं कि बरसात से पहले बोर खनन हो जाएगी
अफजल अमानुल्लाह
कार्यपालन यंत्री पीएचई विभाग डिंडोरी
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