अधिवक्ता राजेश कुमार वर्मा की दलीलों पर मिला संरक्षण
प्रयागराज 5 जून (आरएनएस)। फतनपुर थान क्षेत्र दर्ज केस क्राइम संख्या 0064/ 2026 के संबंध में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की चपेट में आने से एक आठ वर्षीय बालक गंभीर रूप से झुलस गया। मामले में पीडि़त पिता की तहरीर पर बिजली विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित अन्य लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है।
जिसमे शिकायतकर्ता तेज बहादुर ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 में उनके मकान के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन खींची गई थी। उन्होंने उस समय ही बिजली विभाग के अधिकारियों से लाइन हटाने की मांग की थी और संभावित दुर्घटना की आशंका जताई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। तहरीर के अनुसार, 11 मार्च 2026 को सुबह लगभग 7 बजे उनका आठ वर्षीय पुत्र प्रतीक सरोज मकान की छत पर चला गया और वहां गुजर रही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गया।
पहले उसे सीएचसी गौरा ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान संक्रमण बढऩे के कारण उसका एक हाथ काटना पड़ा। जिसमे बिजली विभाग के आठ अधिकारियो पर एफआईआर दर्ज हुई। बिजली विभाग के आठ अधिकारियो ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में अभय कुमार यादव सेवानिवृत्ति जूनियर इंजीनियर एवं अन्य बनाम राज्य सरकार के मामले में याचिका दायर की। जिसमे मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन एवं न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ के समक्ष हुई याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार वर्मा ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एफआईआर को चुनौती दे रहे हैं, और कानून के अनुरूप गिरफ्तारी से संरक्षण चाहते हैं। उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया कि आरोपित धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य तथा सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई मामलों में निर्धारित सिद्धांत लागू होते हैं।
अधिवक्ता राजेश कुमार वर्मा ने यह भी दलील दी कि बीएनएस 2023 की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है तथा पुलिस को गिरफ्तारी से पूर्व वैधानिक शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय बार-बार अनावश्यक गिरफ्तारी से बचने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने पर बल देता रहा है। दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए विवेचनाकर्ता को निर्देश दिया कि वह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों एवं बीएनएसएस के प्रावधानों का पालन करे। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर विवेचना में सहयोग करने का भी निर्देश दिया है।
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