लखनऊ 7 जून (आरएनएस ): उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में कृषि एवं पशुपालन सदैव आर्थिक और सामाजिक जीवन की धुरी रहे हैं। निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश की बढ़ती समस्या के समाधान हेतु राज्य सरकार द्वारा लागू निराश्रित गोवंश संरक्षण कार्यक्रम अब प्रभावी परिणाम दे रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।आगरा जनपद के बाह तहसील स्थित ग्राम खेड़ा राठौर में स्थापित वृहद गौ संरक्षण केंद्र इस नीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व स्थापित यह केंद्र आज बेसहारा, बीमार एवं कमजोर गोवंश के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।चार सौ गोवंश की क्षमता वाले इस केंद्र में वर्तमान में चार सौ से अधिक पशु सुरक्षित रूप से संरक्षित हैं। जिला प्रशासन के कुशल प्रबंधन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलते प्रत्येक पशु को समुचित पोषण, चिकित्सा सुविधा एवं देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।करीब एक एकड़ क्षेत्रफल में विकसित इस केंद्र में चार सौ कुंतल क्षमता वाला भूसा गोदाम, आधुनिक चरही व्यवस्था, केयरटेकर कक्ष एवं प्रशासनिक कार्यालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। भूसा गोदाम का निर्माण उत्तर–दक्षिण दिशा में किया गया है, जिससे वायु संचार एवं नमी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके और चारे की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहे।केंद्र का स्थान चयन भी वैज्ञानिक आधार पर किया गया है, जो आबादी क्षेत्र से सुरक्षित दूरी पर स्थित होने के साथ ही मुख्य मार्ग से पक्की सड़क द्वारा जुड़ा है, जिससे चारे की आपूर्ति एवं चिकित्सकीय सेवाओं का संचालन सुचारू रहता है। बेहतर जल निकासी व्यवस्था के कारण बरसात के मौसम में भी परिसर जलभराव से मुक्त रहता है।यहां वर्तमान में बछड़े एवं बछडिय़ों सहित गर्भवती और दुधारू गायों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। लगभग दो टन प्रतिदिन हरे चारे का उत्पादन केंद्र परिसर में ही किया जा रहा है, जिससे यह आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है।इस योजना के परिणामस्वरूप न केवल गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिला है, बल्कि किसानों की फसलों को होने वाला नुकसान भी लगभग समाप्त हो गया है। इससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा खेतों की सुरक्षा की समस्या का समाधान भी हुआ है। गोवंश से प्राप्त जैविक खाद कृषि भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायक बन रही है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो रही है।प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 12.29 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख से अधिक गोवंश को आश्रय दिया गया है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.82 लाख से अधिक गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं।निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु हजारों आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा कई जनपदों में कमांड एवं कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। साथ ही गोचर भूमि के विकास, हरे चारे के उत्पादन, गोबर गैस संयंत्रों एवं वर्मी कम्पोस्ट जैसे उपायों से ग्रामीण स्वावलंबन को बढ़ावा मिल रहा है।खुरपका, मुंहपका, गलाघोटू एवं लंपी स्किन डिजीज जैसी बीमारियों के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण अभियान से पशु स्वास्थ्य संरक्षण को मजबूती मिली है।खेड़ा राठौर का यह वृहद गौ संरक्षण केंद्र इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित सरकारी नीति, प्रशासनिक दक्षता और जनभागीदारी के समन्वय से न केवल पशुधन संरक्षण संभव है, बल्कि ग्रामीण विकास, कृषि सुधार और पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

