बाराबंकी। जिला महिला चिकित्सालय में आउटसोर्सिंग के तहत तैनात एक सुरक्षा गार्ड को नियमों को ताक पर रखकर जबरन नौकरी से निकालने और उसकी जगह मोटी रकम लेकर दूसरे कर्मचारी को रखने का बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीडि़त सुरक्षा गार्ड वेंकट रमन ने इस भ्रष्टाचार और उत्पीडऩ के खिलाफ क्षेत्रीय विधान परिषद सदस्य अंगद सिंह से न्याय की गुहार लगाई है, जिस पर संज्ञान लेते हुए एमएलसी ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ग्राम बनौक किशुनदासपुर निवासी वित्तीय वर्ष 2025-26 से चिकित्सालय में सुरक्षा गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में उनका समायोजन वंशिका एच.आर. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से महिला अस्पताल में हुआ था। पीडि़त के अनुसार, बीती 25 मई को उनके चाचा सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में तीमारदारी के लिए कुछ दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहना पड़ा। आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने मिलकर सेवा प्रदाता एजेंसी के साथ मिलीभगत कर ली। पीडि़त का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे नौकरी से हटाने की धमकी दी और किसी अन्य बाहरी व्यक्ति से सुविधा शुल्क लेकर चुपचाप नई नियुक्त कर दी। बीती 5 जून को जब वेंकट रमन अपनी ड्यूटी पर वापस लौटा, तो उसे मौखिक रूप से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पीडि़त ने रोते हुए बताया कि वह अत्यंत गरीब परिवार से आता है और पिछले 5 महीनों से उसे एजेंसी द्वारा मानदेय भी नहीं दिया गया है। ऐसे में अचानक नौकरी जाने से उसके पूरे परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पीडि़त ने इसकी लिखित शिकायत भाजपा एमएलसी अंगद सिंह से की। एमएलसी ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए महिला सीएमएस को उक्त मामले की जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिये हैं।
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