रायगढ, 11 जून (आरएनएस)। महिलाओं की गरिमा भंग करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के पांच साल पुराने मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, घरघोड़ा के न्यायालय ने सुनाया।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में तरुण कुमार साहू, छबिलाल साहू और उग्रसेन साहू शामिल हैं। मामले की विवेचना तत्कालीन थाना पूंजीपथरा में पदस्थ उपनिरीक्षक गिरधारी साव ने की थी, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सत्यनारायण महिलाने ने प्रभावी पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार 23 अक्टूबर 2020 को पीडि़ता ने थाना पूंजीपथरा में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि 14 अक्टूबर 2020 को वह अपने मंगेतर के साथ बंजारी मंदिर, तराईमाल दर्शन के लिए गई थी। लौटते समय गोदगोदा नाला घाट के पास आरोपी वहां पहुंचे और दोनों के साथ गाली-गलौज की। आरोपियों ने कथित रूप से पीडि़ता और उसके मंगेतर के कपड़े उतरवाकर अश्लील फोटो और वीडियो बनाए तथा उन्हें सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर रकम की मांग की।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए। मोबाइलों की वैज्ञानिक जांच में पीडि़ता के अश्लील वीडियो बनाए जाने के साक्ष्य मिले। न्यायालय में पीडि़ता, उसके मंगेतर समेत नौ गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा 16 दस्तावेजी और भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को महिला की गरिमा भंग करने और अश्लील वीडियो बनाकर धमकी देने का दोषी पाया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354-क और 354-ग के तहत तीन-तीन वर्ष तथा धारा 509-क के तहत एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। हालांकि लूटपाट से संबंधित आरोपों को अभियोजन पक्ष न्यायालय में सिद्ध नहीं कर सका।
रायगढ़ पुलिस ने इस फैसले को महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों में प्रभावी विवेचना और सशक्त अभियोजन का परिणाम बताया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है।
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