०मछली पालन से प्रतिमाह 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे किसान
दंतेवाड़ा,12 जून (आरएनएस)। केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना तथा मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। ग्राम पालनर निवासी किसान श्री नीरज गुप्ता इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने कृषि के साथ मछली पालन को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।पहले श्री नीरज गुप्ता की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्होंने आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में मत्स्य पालन को अपनाने का निर्णय लिया। मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन एवं मत्स्य संपदा योजना के तहत प्राप्त शासकीय सहायता और अनुदान से उन्होंने तालाब का निर्माण कराया तथा लगभग दो वर्ष पूर्व मछली पालन शुरू किया।प्रारंभिक दौर में उन्हें मछली पालन की तकनीकी जानकारी प्राप्त करने और तालाब प्रबंधन सीखने में समय लगा, लेकिन उन्होंने निरंतर मेहनत जारी रखी। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में गुणवत्तायुक्त मछली बीज का संचयन, संतुलित आहार प्रबंधन तथा तालाब की नियमित देखरेख के कारण मछलियों का उत्पादन लगातार बढ़ता गया। आज वे मछली विक्रय से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।श्री गुप्ता बताते हैं कि प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के माध्यम से कृषि एवं ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से किसानों को नई संभावनाएं मिल रही हैं। कृषि के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर उन्होंने अपनी आय के स्रोतों का विस्तार किया है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। अब बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को पूरा करना पहले की अपेक्षा आसान हो गया है।भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए श्री नीरज गुप्ता कहते हैं कि वे एक और बड़ा तालाब निर्माण कर रोहू एवं कतला जैसी उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन करना चाहते हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय में और वृद्धि हो सके। इसके लिए वे वर्तमान आय के साथ-साथ शासकीय योजनाओं से मिलने वाली सहायता का उपयोग करेंगे।आज श्री नीरज गुप्ता अपने गांव और आसपास के किसानों को भी मछली पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन भी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

