० माल्स संस्कृति के चलते व्यापारी और ग्राहक को भगवान नहीं मानते
रायपुर, 13 जून (आरएनएस)। व्यापार व्यवसाय में वर्षों से बोहनी के समय एवं कभी भी ग्राहक आने पर उसे भगवान मानने की परंपरा भारत में वर्षों से रही है। व्यापार चाहे फुटकर वस्तुओं को हो या फिर थोक बाजार हो ग्राहक हमेशा से ही व्यापारियों के लिए भगवान रहा है। किंतु यह भावना अब धीरे धीरे समाप्त होते जा रही है। जब से माल्स संस्कृति राजधानी एवं प्रदेश के अन्य जिलों में पनपी है तब से व्यापार में अच्छा मुनाफा होने के कारण अब व्यापारी भी ग्राहक को भगवान के माफिक नहीं मान रहे। उक्त बातें लोधीपारा निवासी नीलकंठ मुखर्जी ने लोधीपारा के इलेक्ट्रिक दुकान में सामान लेते समय आरएनएस प्रतिनिधि को कही। प्रतिनिधि स्वयं भी वहां पर इमरजेंसी लाइट लेने पहुंचा था। ज्ञातव्य है कि राजधानी में 60 प्लस के वृद्धजन कई बार वस्तुओं के संबंध में दुकानदार को समझा नहीं पाते है। उसकी बात धैर्य से सुनने के बजाय व्यापारी उसका अपमान करते हैं। इन दिनों रायपुर में वरिष्ठ नागरिकों के साथ अनेक व्यावसायिक संस्थान में दुव्र्यवहार किये जाने की घटनाएं सामने आ रही है। व्यापारियों द्वारा वृद्धजनों के साथ किये जाने वाले उपेक्षित व्यवहार से वृद्धजन पीडि़त है।
गौरतलब है कि अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों के बच्चे चाहे वो बेटी दामाद हो या फिर बेटा बहू। अधिकांश नौकरी पेशा है कोई रायपुर में है या कोई रायपुर से बाहर है। अधिकांश वृद्धों को ऑन लाइन फोन पे एवं अन्य तकनीकी जानकारी नहीं है। जिसकी वजह से वह स्वयं दुकान जाते है और कभी कभी शारीरिक व्याधि के कारण अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। स्वयं प्रतिनिधि ने नीलकंठ मुखर्जी के साथ दुकानदार द्वारा किये गये दुव्र्यवहार पर दुकानदार को समझाने की कोशिश की तो इलेक्ट्रिकल दुकान का मालिक उससे उलझ पड़ा। नीलकंठ मुखर्जी ने चेंबर ऑफ कामर्स के पदाधिकारियों से रायपुर सहित प्रदेश भर में सदस्यों के लिए वर्कशॉप आयोजित किये जाने की मांग की ताकि वृद्धजनों के साथ दुव्र्यवहार की घटनाएं रोकी जा सके। मुखर्जी के अनुसार इन दिनों रायपुर में फुटकर व्यापारियों की अच्छी कमाई हो रही है जिसके चलते धनवान होने का घमंड उनके अंतरमन में समा गया है। शंकर नगर निवासी श्रीमती शारदा अग्रवाल ने भी उक्त घटनाओं के होने का विरोध किया है। ज्यादातर घटनाएं दुकानों में तब होती है जब दुकान का मालिक लंच टाइम में 2 से 4 के बीच नौकरों के अथवा पुत्रों के भरोसे दुकान छोड़कर जाते है।
शर्मा
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