रायपुर, 16 जून (रायपुर)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एक बार फिर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार सुबह केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों ने प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों रायपुर, दुर्ग, धमतरी, कोरबा और अंबिकापुर में एक साथ नौ अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। ईडी की यह कार्रवाई भारतमाला सड़क परियोजना में हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के उपयोग में हुई गंभीर गड़बडिय़ों को लेकर हुई है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, धमतरी में प्रतिष्ठित कारोबारी दीपेश गांधी के ठिकानों पर ईडी की टीम ने तड़के धावा बोला। वहां न केवल जमीनी और वित्तीय दस्तावेजों को जब्त किया गया, बल्कि कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी गहनता से जांच की जा रही है। भारतमाला परियोजना के तहत जमीनों के अधिग्रहण और उसके बदले बांटे गए मुआवजे में बड़े पैमाने पर हेरफेर के सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
डीएमएफ घोटाले से संदिग्धों के यहा रेड
दूसरी तरफ, दुर्ग और कोरबा जिलों में ईडी की टीमों ने डीएमएफ फंड घोटाले से जुड़े संदिग्धों के यहां मोर्चा संभाला है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जनहित और विकास कार्यों के लिए आरक्षित जिला खनिज न्यास निधि का उपयोग किन नियमों को ताक पर रखकर किया गया और इसका पैसा कहां-कहां ट्रांसफर हुआ।
इनके यहां पहुंची केंद्रीय जांच टीम
राजधानी रायपुर और अंबिकापुर में भी ईडी की जांच का दायरा बढ़ा है। जिन प्रमुख लोगों के व्यावसायिक और आवासीय परिसरों पर कार्रवाई चल रही है, उनमें प्रकाश सालुंगे, किशोर एग्रो (रायपुर) के शाश्वत लुणावत और मानसून एग्रो (अंबिकापुर) के राजेश गुप्ता शामिल हैं। इन सभी ठिकानों पर तैनात सुरक्षाबलों की मौजूदगी में ईडी के अधिकारी बैंकिंग लेनदेन, टैक्स इनवॉइस और डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं।
एसएस
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