0 फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
0 विशेषज्ञों ने दिया हृ्रस्नढ्ढस्, रूष्ट और फिंगरप्रिंट साक्ष्य संकलन का प्रशिक्षण, वैज्ञानिक विवेचना को मिलेगा बल
जांजगीर-चांपा, 17 जून (आरएनएस)। अपराधों की वैज्ञानिक एवं प्रभावी विवेचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक श्री विजय कुमार पाण्डेय (आईपीएस) के निर्देशन में फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 16 जून को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज की फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ श्रीमती विद्या जौहर ने मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट, NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) तथा MCU के उपयोग संबंधी व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न थाना एवं चौकियों से आए उप निरीक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान अपराध स्थल पर उपलब्ध फिंगरप्रिंट साक्ष्यों के वैज्ञानिक तरीके से संकलन, संरक्षण एवं विश्लेषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फिंगरप्रिंट साक्ष्य अपराधियों की पहचान स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और न्यायालय में मजबूत साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में NAFIS प्रणाली के माध्यम से देशभर के फिंगरप्रिंट डाटाबेस से त्वरित पहचान की प्रक्रिया और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी भी दी गई। साथ ही मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट की सहायता से घटनास्थल पर छिपे हुए फिंगरप्रिंट विकसित करने की तकनीक का प्रदर्शन कर पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कुमार कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ-साथ अपराधों के शीघ्र और प्रभावी निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धतियों को अपनाकर अपराध नियंत्रण एवं विवेचना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उसी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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