कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। राज्य में हॉकरों (फेरीवालों) को हटाने के लिए चलाए जा रहे हालिया अभियान और उनके उचित पुनर्वास की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर अपने चिर-परिचित ‘स्ट्रीट फाइटरÓ अंदाज में नजर आईं। सैंकड़ों समर्थकों और हॉकर यूनियनों के नेताओं साथ उन्होंने खुद सड़क पर उतरकर एक विशाल पदयात्रा का नेतृत्व किया और वर्तमान प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। उक्त रैली में बड़ी संख्या में हॉकर्स, ट्रेड यूनियन से जुड़े प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हुए। शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग इस आंदोलन में भाग लेने के लिए पहुंचे। हाल ही में कोलकाता नगर क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद से हॉकर्स समुदाय में भारी असंतोष और भय का माहौल देखा जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने किया। रैली से उन्होंने हॉकर्स की आजीविका और पुनर्वास के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। टीएमसी का कहना है कि फुटपाथ और सड़क किनारे व्यापार करने वाले हजारों लोग लंबे समय से इसी पर निर्भर हैं और अचानक हटाने की कार्रवाई से उनका रोजगार संकट में पड़ गया है।
धर्मतला के इस आंदोलन में कई हॉकर्स संगठनों ने भी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसी भी तरह की हटाने की कार्रवाई से पहले वैकल्पिक पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए। हॉकर्स का कहना है कि बिना योजना के की जा रही कार्रवाई से छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आजीविका, मानवाधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा आंदोलन है। पार्टी नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि सरकारों को पहले पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए, उसके बाद ही किसी प्रकार की हटाने की कार्रवाई होनी चाहिए।
इस प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें मदन मित्रा प्रमुख रूप से शामिल थे। उन्होंने भी हॉकर्स के समर्थन में अपनी बात रखी और अभियान को लेकर असंतोष जताया। इस बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हॉकर्स नीति और शहरी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कोलकाता की शहरी राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक सवाल बन सकता है।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

