# डॉ. राजशेखर ने माउंट डेनाली पर सफल आरोहण कर रचा इतिहास, 7 समिट्स चुनौती पूरी की
हैदराबाद, 18 जून (आरएनएस)। भारतीय पर्वतारोही एवं वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजशेखर ने उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट डेनाली पर सफलतापूर्वक पहुंचकर प्रतिष्ठित ‘7 समिट्स’ चुनौती पूरी कर ली है। इसके साथ ही वे दक्षिण भारत के राज्यों से आने वाले पहले चिकित्सक बन गए हैं जिन्होंने सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण का यह गौरवशाली कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉ. राजशेखर की यह उपलब्धि केवल पर्वतारोहण का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी भी है। इस पूरे अभियान के दौरान उन्हें ‘बूट्स एंड क्रैम्पॉन’ के संस्थापक भरत थामिनेनी का निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्राप्त हुआ, जिसने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिप और नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के विशेषज्ञ तथा रोबोटिक सर्जन डॉ. राजशेखर ने वर्षों तक हैदराबाद के अग्रणी आर्थोपेडिक विशेषज्ञों के साथ कार्य किया और नई पीढ़ी के सर्जनों को प्रशिक्षित किया। हालांकि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमित होने के बाद उनका जीवन अप्रत्याशित रूप से बदल गया। संक्रमण गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। कोविड से उबरने के बाद भी चुनौतियां समाप्त नहीं हुईं। लगातार थकान और मानसिक रूप से उत्साह में कमी के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष तक अपने पेशेवर कार्यों से दूरी बनानी पड़ी।
स्वास्थ्य को दोबारा मजबूत बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वयं के लिए एक असाधारण लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने पर्वतारोहण को चुना—एक ऐसा खेल जो शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की कठोर परीक्षा लेता है—और इसके लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण शुरू किया। उनकी 7 समिट्स यात्रा की शुरुआत 26 जनवरी 2022 को तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो पर सफल आरोहण से हुई। इसके बाद अगस्त 2022 में उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को भी फतह किया। इस दौरान कई चोटों का सामना करने के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष का विराम लेना पड़ा। वापसी के बाद उन्होंने अगस्त 2023 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोस्यूस्को पर सफलता हासिल की तथा 4 फरवरी 2024 को दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकोंकागुआ के शिखर तक पहुंचे। एक आर्थोपेडिक डॉक्टर से विश्वस्तरीय पर्वतारोही बनने तक का डॉ. राजशेखर का यह सफर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों से उबरकर भी बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी साहस, संकल्प, संघर्ष और विजय की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी है।
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