कोरबा 19 जून (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने वन विभाग की वर्तमान नीतियोंऔर हालिया प्रस्तावो विभाग में रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुन: नियोजित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। साथ ही, मैदानी अमले पर व्यावहारिक कठिनाइयों को समझे बिना बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नियोजन का कड़ा विरोध करते हुवे प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वन विभाग में हजारों पद रिक्त होने के बावजूद नई भर्ती करने या वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्म चारियों को नियमित करने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा कार्य पर रखने का प्रस्ताव लाया जा रहा है।
यह निर्णय छत्तीसगढ़ के लाखों शिक्षित बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। संघ मांग करता है कि इन रिक्त पदों पर पहला अधिकार प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और सालों से सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का है। इस प्रकार के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करना चाहिए। साथ ही वनरक्षक, वनपाल और उपवनक्षेत्रपाल, के लिए लागू की जा रही बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को पूरी तरह से अव्यावहारिक बताया गया है। प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मैदानी कर्मचारी चैबीसों घंटे घने जंगलों में नेटवर्क विहीन क्षेत्रों और दुर्गम वन्यजीव इलाकों में ड्यूटी करते हैं। जंगल की सुरक्षा वन्यप्राणी संरक्षण और तस्करों को पकडने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती। ऐसे में उन्हें मुख्यालय या निश्चित केंद्रो पर आकर बायोमेंट्रिक उपस्थिति लगाने के लिए मजबूर करना कर्मचारियों के मनोबल को तोडने जैसा है। मांग है कि रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त कर्म चारियों के नियोजन के प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए और सभी रिक्त पदों पर नई सीधी भर्ती निकाल कर छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाए या विभाग में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदोंपर समायोजित किया जाए। मैदानी अमल वनरक्षक, वनपाल, उपवनक्षेत्रपाल की कार्य शैली को देखते हुए बायोमेट्रिक उपस्थिति के अव्यावहारिक निर्देश को निरस्त किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि इन जायज मांगो पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया जाता और युवाओं तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी व वन कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जाती तो छत्तीसगढ़ वन कर्म चारी संघ पूरे प्रदेश में आंदोलन और कार्य बहिष्कार करने के लिए बाध्य होगा।
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