सारंगढ़-बिलाईगढ़ 19 जून 2026/अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, अब उसकी पहचान उंगलियों के निशान से छिप नहीं सकेगी। अपराधों की विवेचना को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में सारंगढ़-बिलाईगढ़ पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए जिले के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट साइंस एवं चांस प्रिंट की विशेष ट्रेनिंग दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य घटनास्थल से मिलने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपराधियों तक तेजी से पहुंचना और न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करना है।
शुक्रवार 19 जून 2026 को आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पांडे एवं एसडीओपी सारंगढ़ स्नेहिल साहू के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी थाना एवं चौकी से आए विवेचक, पुलिस अधिकारी, कर्मचारी तथा प्रशिक्षु उप निरीक्षक सहित 50 से अधिक पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का संचालन फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट डीएसपी विद्या जौहर ने किया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और चांस प्रिंट को वैज्ञानिक तरीके से खोजने, सुरक्षित रखने, विकसित करने तथा न्यायालयीन साक्ष्य के रूप में प्रभावी उपयोग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही Identification of Prisoners/Criminal Procedure (Identification) Act, 2022 के अंतर्गत फिंगरप्रिंट एवं अन्य जैविक नमूने लेने से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) के उपयोग और डिजिटल माध्यम से संदिग्धों की त्वरित पहचान की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।
जिला पुलिस का मानना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति अपनाने से अज्ञात आरोपियों की पहचान तेज होगी, विवेचना अधिक प्रभावी बनेगी और न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इसी उद्देश्य से भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस बल की तकनीकी दक्षता लगातार बढ़ती रहे।
बहरहाल, बदलते अपराध और आधुनिक तकनीक के इस दौर में सारंगढ़-बिलाईगढ़ पुलिस भी खुद को लगातार अपडेट कर रही है। अब जांच केवल बयान और सबूतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विज्ञान की मदद से अपराधियों तक पहुंचने की रफ्तार और सटीकता दोनों बढ़ेंगी।




