कोलकाता,20 जून(आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की सत्ता से बेदखल होते ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच पार्टी के तीन बैंक खातों को पुलिस ने डेबिट फ्रीज कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद इन खातों से फिलहाल किसी भी प्रकार की निकासी नहीं की जा सकेगी। सूत्रों के अनुसार, इन तीनों खातों में कुल लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। बताया गया है कि हाल ही में तृणमूल नेता अरूप विश्वास ने संबंधित निजी बैंक को पत्र लिखकर इन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा पार्टी के विद्रोही खेमे से जुड़े लगभग 10 विधायकों ने भी इस संबंध में बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय से शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खातों पर रोक लगा दी।
तृणमूल कांग्रेस में इन दिनों ‘वास्तविक तृणमूलÓ को लेकर विवाद जारी है। पार्टी से बगावत करने वाले कुछ सांसद पहले ही अलग राजनीतिक रास्ता अपना चुके हैं, जबकि कई असंतुष्ट विधायक दावा कर रहे हैं कि वही वास्तविक तृणमूल का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूत्रों के अनुसार, अरूप विश्वास ने उस समय बैंक को पत्र लिखा था जब वह पार्टी के कोषाध्यक्ष थे। 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उनकी जगह पूर्व राज्यसभा सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि बैंकिंग प्रक्रिया के अनुसार अभी तक उन्हें अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में दर्ज नहीं कराया गया है। इस कारण बैंक के रिकॉर्ड में अरूप विश्वास ही अधिकृत कोषाध्यक्ष बने हुए हैं।
इसी बीच गुरुवार को कई विद्रोही तृणमूल विधायकों ने बिधाननगर पुलिस के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि संबंधित खातों में पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध रूप से प्राप्त धन जमा किया गया है। शिकायत में कहा गया कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो डिजिटल लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक को तीनों खातों के डेबिट लेनदेन पर रोक लगाने का निर्देश दिया। हालांकि शिकायत में खाताधारकों के नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। चुनाव आयोग को पूर्व में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, इनमें से एक खाता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम पर है, जबकि अन्य दो खाते पार्टी की त्रिपुरा और गोवा इकाइयों के नाम से पंजीकृत हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को थाने में शिकायत करने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने से पहले पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी से बातचीत की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि प्राथमिकता जांच को दी जा रही है या फिर पार्टी को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में डालने को।
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