नईदिल्ली,21 जून। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. आयोग ने 15 जून 2026 को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से उनकी मांगों के ज्ञापन लेने का पहला चरण पूरा कर लिया है. अब आयोग के पास अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 10 महीने का समय बचा है. इस नए वेतन आयोग के फैसलों का सीधा असर देश के 55 लाख से अधिक कामकाजी कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों की जेब पर पड़ेगा.
सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए सरकार के सामने मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें रखी हैं: वर्तमान में कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ?18,000 है. कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर ?69,000 करने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है. कुछ अन्य एसोसिएशन 3.15 के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं. हालांकि, आर्थिक जानकारों का मानना है कि सरकार इसे 2.5 से ऊपर तय कर सकती है. फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला है जिससे कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है.
कर्मचारी संगठनों की दूसरी सबसे बड़ी मांग नेशनल पेंशन सिस्टम को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की है. इसके अलावा उन्होंने मकान किराया भत्ता, रिस्क पे, सालाना बोनस और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में भी सुधार की मांग की है.
वेतन आयोग के सदस्य पूरे देश का दौरा कर रहे हैं. दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और महाराष्ट्र के बाद अब आयोग की टीम उत्तराखंड के कर्मचारी संगठनों से मुलाकात कर चुकी है. जुलाई 2026 तक लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता में भी ऐसी ही बैठकें होनी हैं, ताकि हर वर्ग की बात सुनी जा सके.
केंद्रीय कर्मचारियों को जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है. अब कर्मचारियों की नजर जुलाई से लागू होने वाले अगले डीए पर है. इसका फैसला मई और जून 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर होगा. सरकार आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में इसका ऐलान करती है. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें भले ही बाद में लागू हों, लेकिन इन्हें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा.
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